एबीसी नेशनल न्यूज | लखनऊ | 25 फरवरी 2026
राजनीतिक बयान से बढ़ी चर्चा
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने बीजेपी पर टिप्पणी करते हुए “बीजेपी हटाओ, सनातन बचाओ” का नारा दिया है, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। यादव ने कहा कि धर्म और आस्था को राजनीति से अलग रखते हुए सामाजिक सौहार्द और परंपराओं के सम्मान पर ध्यान देना चाहिए। उनके बयान को आगामी चुनावी माहौल और धार्मिक मुद्दों पर जारी राजनीतिक विमर्श के संदर्भ में देखा जा रहा है।
संतों के सम्मान और कार्रवाई को लेकर चिंता जताई
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में संतों और धार्मिक व्यक्तित्वों को लेकर विवाद सामने आए हैं, जिससे समाज में असंतोष की भावना पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक परंपरा या संत के सम्मान से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता और संतुलन के साथ संभालने की आवश्यकता है। यादव के अनुसार समाज में संवाद और आपसी सम्मान बनाए रखना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
विरोधियों पर दबाव बनाने के आरोप
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों और असहमति रखने वाले लोगों पर कार्रवाई के आरोप राजनीतिक बहस का विषय बनते रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है और असहमति को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। यादव ने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
बीजेपी का जवाब और राजनीतिक प्रतिक्रिया
वहीं बीजेपी के नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कहा कि सरकार सभी धर्मों और परंपराओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई को धार्मिक या राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य सामाजिक समरसता और विकास को आगे बढ़ाना है।
विश्लेषकों की नजर में चुनावी विमर्श
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक पहचान, सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक बयान जैसे मुद्दे चुनावी दौर में चर्चा का केंद्र बन जाते हैं। ऐसे में बयानबाजी से अलग यह भी जरूरी है कि राजनीतिक दल संवाद और संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखें, ताकि सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो। फिलहाल अखिलेश यादव के बयान के बाद प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।




