एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/तेल अवीव | 25 फरवरी 2026
नए रणनीतिक गठबंधन को लेकर बढ़ी हलचल
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के हालिया बयान के बाद प्रस्तावित “हेक्सागन एलायंस” को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि इस संभावित गठबंधन में कई अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों की भागीदारी संभव है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना, सुरक्षा समन्वय मजबूत करना और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देना बताया जा रहा है। पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बयान को एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भारत समेत चार देशों को कोर पार्टनर बताया
नेतन्याहू ने इस गठबंधन के प्रारंभिक ढांचे पर चर्चा करते हुए भारत को प्रमुख भागीदारों में शामिल बताया। उनके अनुसार इजरायल के साथ भारत, ग्रीस और साइप्रस इस पहल के कोर पार्टनर हो सकते हैं। इन देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग, तकनीकी नवाचार और व्यापारिक कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त काम की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों के बीच पहले से मौजूद रणनीतिक रिश्ते इस तरह के सहयोग को मजबूत आधार प्रदान कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री की संभावित यात्रा से पहले बढ़ा महत्व
यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री Narendra Modi की संभावित इजरायल यात्रा को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं चल रही हैं। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, कृषि तकनीक, स्टार्टअप साझेदारी और निवेश से जुड़े मुद्दों के साथ बहुपक्षीय सहयोग के नए प्रारूपों पर भी बातचीत हो सकती है। इसी कारण हेक्सागन एलायंस को भारत-इजरायल संबंधों के विस्तार के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
सुरक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर संभावित फोकस
विश्लेषकों के अनुसार इस तरह का गठबंधन भूमध्यसागर से हिंद महासागर तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल सहयोग को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है। ग्रीस और साइप्रस की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, इजरायल की तकनीकी क्षमता और भारत का आर्थिक व सामरिक प्रभाव मिलकर एक व्यापक सहयोग ढांचा तैयार कर सकते हैं। इससे व्यापार, निवेश और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी के नए अवसर भी सामने आ सकते हैं।
अन्य देशों के लिए रणनीतिक संकेत
नेतन्याहू द्वारा अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों की संभावित भागीदारी का उल्लेख यह दर्शाता है कि यह पहल भविष्य में व्यापक रूप ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गठबंधन आगे बढ़ता है तो क्षेत्रीय संतुलन, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है, जिससे अन्य देशों की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
आधिकारिक रूपरेखा का इंतजार
फिलहाल इस गठबंधन की औपचारिक संरचना, सदस्यता और कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि संबंधित देशों के बीच आगे की वार्ता और आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही इस पहल की वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी। अभी के लिए हेक्सागन एलायंस को संभावित बहुपक्षीय सहयोग के एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।




