एबीसी नेशनल न्यूज | 16 जनवरी 2026
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) दोनों के दाम नीचे आए हैं। ट्रंप की टिप्पणी के बाद निवेशकों में यह संकेत गया कि मध्य-पूर्व में तनाव फिलहाल और नहीं बढ़ेगा, जिससे तेल आपूर्ति पर तत्काल खतरा कम माना गया।
ऊर्जा बाजार के जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें अक्सर भूराजनैतिक बयानबाज़ी और तनाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं। जैसे ही बाजार को यह आभास हुआ कि ईरान को लेकर स्थिति उतनी आक्रामक नहीं है जितनी आशंका थी, वैसे ही तेल की कीमतों में दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने सुरक्षित दांव की जगह मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा जोखिम कम होता है, तो तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी घटती है। इसी वजह से बाजार में यह धारणा बनी कि फिलहाल सप्लाई स्थिर रह सकती है। इसके साथ ही डॉलर की चाल, वैश्विक मांग में सुस्ती और आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को राहत भरी खबर माना जा रहा है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और महंगाई को काबू में रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि तेल बाजार बेहद संवेदनशील है और आने वाले दिनों में किसी नए बयान या घटनाक्रम से कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ट्रंप के बयान के बाद आई यह गिरावट बताती है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार किस तरह राजनीतिक संकेतों और कूटनीतिक बयानों से प्रभावित होता है, और आने वाले समय में ईरान से जुड़ी हर गतिविधि पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।




