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अनिल अंबानी को मिली राहत के खिलाफ बैंकों की बड़ी चुनौती, बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा मामला

अमरनाथ प्रसाद | मुंबई | 14 जनवरी 2026

उद्योगपति अनिल अंबानी को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली राहत अब नए कानूनी विवाद में फंसती नजर आ रही है। कई बैंकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी। बैंकों का कहना है कि अदालत के इस आदेश से न सिर्फ उनकी वसूली प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि इससे बैंकिंग व्यवस्था और नियमों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। इस चुनौती के साथ मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

दरअसल, कुछ समय पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बैंकों द्वारा अनिल अंबानी और उनकी समूह कंपनियों के खिलाफ उठाए गए कदमों पर अंतरिम राहत दी थी। यह राहत उन कार्रवाइयों से जुड़ी थी, जिनमें बैंकों ने कथित तौर पर फोरेंसिक ऑडिट के आधार पर खातों को धोखाधड़ी की श्रेणी में डालने की प्रक्रिया शुरू की थी। अदालत ने उस समय कहा था कि ऑडिट और उससे जुड़ी प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल हैं, जिन्हें स्पष्ट किए बिना आगे की कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।

अब बैंकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। बैंकों का तर्क है कि जिस फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई, वह उस समय लागू नियमों के अनुसार ही थी। उनका कहना है कि बाद में आए नए दिशा-निर्देशों को पुराने मामलों पर लागू करना सही नहीं है। बैंकों ने यह भी कहा है कि अगर अदालत का राहत वाला आदेश बना रहता है, तो इससे बैंकों के अधिकार कमजोर होंगे और भविष्य में बड़े कर्ज मामलों में कार्रवाई करना मुश्किल हो जाएगा।

बैंकों का यह भी तर्क है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर बड़ी रकम का कर्ज बकाया है और लंबे समय से उसकी वसूली नहीं हो पा रही है। ऐसे में यदि कार्रवाई पर रोक लगी रहती है, तो इससे सार्वजनिक धन को नुकसान पहुंच सकता है। बैंकों के अनुसार, यह सिर्फ एक व्यक्ति या एक समूह का मामला नहीं है, बल्कि इससे पूरे बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और अनुशासन जुड़ा हुआ है। इसलिए अदालत को पहले दिए गए आदेश पर दोबारा विचार करना चाहिए।

अनिल अंबानी की ओर से यह दलील दी गई है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई जल्दबाजी और नियमों की अनदेखी के साथ की गई थी। उनका कहना है कि यदि बिना उचित प्रक्रिया के खातों को धोखाधड़ी घोषित कर दिया जाता है, तो इससे उनकी प्रतिष्ठा, कारोबार और भविष्य की संभावनाओं पर गहरा असर पड़ता है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से संरक्षण की मांग की थी, जिसे पहले चरण में स्वीकार किया गया।

अब यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की उच्च पीठ के सामने है, जहां यह तय होना है कि अनिल अंबानी को दी गई राहत बरकरार रहेगी या बैंकों को अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति मिलेगी। इस फैसले का असर सिर्फ अनिल अंबानी पर ही नहीं, बल्कि देश के बैंकिंग सेक्टर और बड़े कर्ज मामलों की कानूनी दिशा पर भी पड़ेगा। सभी की निगाहें अब हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं, जो यह साफ करेगा कि कर्ज वसूली और नियमों के बीच संतुलन किस तरह तय किया जाएगा।

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