एबीसी नेशनल न्यूज | 13 जनवरी 2026
जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने ईरान को लेकर एक बेहद अहम और सीधा बयान दिया है। भारत यात्रा के दौरान बेंगलुरु में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ईरान का मौजूदा शासन अब अपने अंतिम दिनों में पहुंच चुका है। उनका कहना है कि ईरान में जो विरोध प्रदर्शन पहले आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुए थे, अब वे पूरी तरह से शासन परिवर्तन की मांग में बदल चुके हैं। चांसलर मैर्त्स ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी सरकार जो केवल हिंसा और डर के सहारे सत्ता में बनी रहती है, उसका अंत तय होता है। फ्रीडरिष मैर्त्स ने ईरान में प्रदर्शन कर रहे आम लोगों पर हो रही सख्त कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ईरानी सुरक्षा बल जिस तरह से प्रदर्शनकारियों के साथ क्रूरता कर रहे हैं, वह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। चांसलर ने कहा कि ईरानी जनता अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर है, और अब यह आंदोलन केवल महंगाई या बेरोजगारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आज़ादी और लोकतंत्र की मांग बन चुका है।
जर्मन चांसलर ने यह भी बताया कि ईरान के हालात पर जर्मनी, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस लगातार संपर्क में हैं। इन देशों के विदेश मंत्री आपस में बातचीत कर रहे हैं, ताकि हालात पर नज़र रखी जा सके और ईरान में किसी तरह का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि इन देशों की कोशिश है कि ईरान में एक ऐसी सरकार बने जो जनता की आवाज़ सुने और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करे।
मैर्त्स ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ भी इस मुद्दे पर कूटनीतिक समन्वय जारी है। उद्देश्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान पर दबाव बनाया जाए, ताकि वहां हिंसा रुके और बातचीत के जरिए समाधान निकले। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा टकराव का अंत शांतिपूर्ण तरीके से होगा और ईरानी जनता को उनका हक मिलेगा।
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब यूरोप में ईरान को लेकर सख्ती बढ़ती जा रही है। जर्मनी पहले ही यूरोपीय संघ के भीतर ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई आईआरजीसी (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग का समर्थन कर रहा है। ऐसे में जर्मन चांसलर का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है। जर्मनी का यह साफ संकेत है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अब ईरान में हो रहे बदलावों को गंभीरता से देख रही हैं। सवाल अब यह है कि आने वाले दिनों में ईरान का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाएगा और क्या वहां की जनता को वह बदलाव मिल पाएगा, जिसकी वह लंबे समय से मांग कर रही है।




