सुमन कुमार | नई दिल्ली 9 जनवरी 2026
अमेरिका के साथ भारत की बहुचर्चित ट्रेड डील अब तक न हो पाने को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर तीखा और सीधा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि इस अहम आर्थिक समझौते की विफलता के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय दबाव या तकनीकी अड़चन नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की हिचक, देरी और प्राथमिकताओं की गड़बड़ी जिम्मेदार है। पार्टी के अनुसार, यह सिर्फ एक डील का मामला नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति, वैश्विक साख और आर्थिक हितों को पहुंचा बड़ा नुकसान है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आज BJP और मोदी समर्थक अमेरिकी कॉमर्स सचिव के आधे-अधूरे बयानों को सुनकर खुशियां मना रहे हैं, जबकि पूरा सच इसके उलट है। कांग्रेस का कहना है कि अगर तथ्यों को क्रमवार देखा जाए तो यह साफ हो जाता है कि सरकार की लापरवाही और निर्णयहीनता ने भारत को एक ऐतिहासिक अवसर से वंचित कर दिया। पार्टी के मुताबिक, इसे कूटनीतिक सफलता बताना देश के साथ धोखे जैसा है।
कांग्रेस का दावा है कि ट्रेड डील के सबसे अहम चरण पर प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे बात करने में झिझकते रहे। जबकि उस वक्त तेज़ राजनीतिक संवाद की ज़रूरत थी, मोदी सरकार ने समय गंवाया। कांग्रेस के अनुसार, करीब तीन हफ्ते बाद जब प्रधानमंत्री और उनकी सरकार बातचीत को तैयार हुए, तब तक हालात बदल चुके थे और डील हाथ से निकल चुकी थी। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में समय ही सबसे बड़ी पूंजी होता है, जिसे मोदी सरकार ने गंवा दिया।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि जब खुद की छवि और PR का सवाल होता है, तब प्रधानमंत्री खुद आगे बढ़कर फोन करते हैं— “Sir, may I see you please”— लेकिन जब बात देश के आर्थिक हितों और करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी की आती है, तब वही प्रधानमंत्री आना-कानी करने लगते हैं। कांग्रेस के मुताबिक, यह फर्क साफ दिखाता है कि सरकार की प्राथमिकता देश नहीं, प्रचार है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका इस समय “पहले आओ–पहले पाओ” के सिद्धांत पर ट्रेड डील कर रहा है। इस कतार में भारत का नंबर दूसरा था, लेकिन यूनाइटेड किंगडम (UK) के प्रधानमंत्री ने समय रहते बातचीत कर अपनी डील फाइनल कर ली। इसके बाद जब भारत की बारी आई, तो मोदी सरकार की सुस्ती और ढिलाई के कारण मौका हाथ से निकल गया। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार ने उस समय तेजी दिखाई होती, तो आज भारत–अमेरिका ट्रेड डील हकीकत होती। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने हाथ पर हाथ धरे रखे, वक्त निकल गया और अब हालात यह हैं कि भारत अमेरिका के सामने डील के लिए गुहार लगा रहा है, लेकिन अमेरिका इसके लिए राज़ी नहीं हो रहा। पार्टी के अनुसार, यह स्थिति भारत की कमज़ोर कूटनीतिक सौदेबाज़ी और गलत विदेश नीति का नतीजा है।
कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार की विदेश नीति की गंभीर विफलता करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने न केवल भारत के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। पार्टी का दावा है कि आज हालात यह हैं कि अमेरिका खुले तौर पर भारत और उसके प्रधानमंत्री का मज़ाक उड़ा रहा है, और वहां भारत-विरोधी कानूनों की तैयारी तक की खबरें सामने आ रही हैं।
सबसे गंभीर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि इन तमाम घटनाओं के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह चुप हैं। न कोई कड़ा बयान, न कोई जवाब, न ही वह मशहूर “लाल आंख” दिखाई दे रही है। कांग्रेस के मुताबिक, जब देश के सम्मान, व्यापार और भविष्य दांव पर हों, तब प्रधानमंत्री की यह चुप्पी कमज़ोरी और असफल नेतृत्व का संकेत है।कांग्रेस के इन आरोपों के बाद अमेरिका-भारत संबंधों, ट्रेड डील और मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार इन गंभीर आरोपों का ठोस जवाब देती है या फिर इस मुद्दे पर भी खामोशी ही उसकी नीति बनी रहती है।




