एबीसी डेस्क 7 जनवरी 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने भारत की राजनीति और कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके राष्ट्रपति बनने के बाद बिना औपचारिक निमंत्रण के ही अमेरिका पहुंचे थे। ट्रंप के मुताबिक, खुद मोदी ने उनसे पूछा था— “सर, क्या मैं आपसे मिलने आ सकता हूं, प्लीज?”—और इसके बाद उन्होंने मिलने की सहमति दी थी। ट्रंप का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो रहा है।
ट्रंप के इस वीडियो बयान के बाद एक पुरानी तस्वीर और घटना फिर चर्चा में आ गई है। आपको याद होगा कि जब मोदी अमेरिका पहुंचे थे, तो दुनिया के अन्य नेताओं के विपरीत ट्रंप उन्हें व्हाइट हाउस के गेट पर रिसीव करने नहीं आए थे। उस वक्त सरकार समर्थकों ने इसे सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया बताया था, लेकिन अब ट्रंप के बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में आमंत्रण और प्रोटोकॉल बेहद अहम होते हैं। आम तौर पर जब किसी देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति को औपचारिक न्योता दिया जाता है, तो स्वागत भी उसी स्तर का होता है। लेकिन अगर दौरा अनौपचारिक या आग्रह पर आधारित हो, तो प्रोटोकॉल में फर्क साफ दिखता है। ट्रंप के बयान ने इसी फर्क को उजागर कर दिया है।
ट्रंप का यह दावा ऐसे समय आया है, जब भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर सरकार लगातार मजबूत दोस्ती और निजी संबंधों की बात करती रही है। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि अगर रिश्ता इतना खास था, तो मोदी को मिलने के लिए खुद क्यों कहना पड़ा? और अगर सब कुछ सामान्य था, तो दुनिया के बाकी नेताओं की तरह गेट पर स्वागत क्यों नहीं हुआ?
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आक्रामक हो गया है। उनका कहना है कि यह घटना बताती है कि फोटो-ऑप और आत्मप्रचार की राजनीति के पीछे असल कूटनीतिक सच्चाई कुछ और है। वहीं, समर्थक इसे ट्रंप की आदत और बयानबाजी का हिस्सा बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विदेश नीति में दिखावे और हकीकत के बीच का फर्क क्या है। जो बात पहले सिर्फ तस्वीरों और कयासों तक सीमित थी, वह अब खुद ट्रंप के शब्दों में सामने आ गई है—और इसी से यह समझ आने लगा है कि मोदी का स्वागत गेट पर क्यों नहीं हुआ था।




