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कभी पार्टी लाइन से नहीं हटा— मोदी–आडवाणी की तारीफ से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव तक, शशि थरूर ने क्या कहा?

महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 6 जनवरी 2026

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव तक—हर मुद्दे पर थरूर ने खुलकर बात की है। उन्होंने साफ कहा कि भले ही उनके विचार कई बार अलग लगें, लेकिन वे कभी भी पार्टी लाइन से बाहर नहीं गए और न ही कांग्रेस से उनका वैचारिक रिश्ता कमजोर पड़ा है। शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आडवाणी की तारीफ को लेकर उठे सवालों पर कहा कि लोकतंत्र में अच्छे काम की सराहना करना कोई गुनाह नहीं है। उनका कहना था कि विरोध की राजनीति का मतलब यह नहीं कि हर बात पर आंख मूंदकर आलोचना ही की जाए। थरूर के मुताबिक, “अगर कोई नेता या सरकार कोई सही कदम उठाती है, तो उसकी तारीफ करना राजनीतिक अपराध नहीं होना चाहिए।”

आडवाणी को बताया लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक

थरूर ने लालकृष्ण आडवाणी को भारतीय राजनीति का वरिष्ठ और अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि उनका योगदान देश के लोकतांत्रिक ढांचे में अहम रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान व्यक्ति के अनुभव और भूमिका के लिए है, न कि किसी विचारधारा को अपनाने का संकेत। थरूर के इस बयान को कई लोग राजनीतिक शालीनता और परिपक्वता से जोड़कर देख रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव पर खुलकर बोले

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भी शशि थरूर ने अपनी बात दो टूक रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए और चुनाव के ज़रिये नेतृत्व तय होना एक स्वस्थ प्रक्रिया है। थरूर ने यह भी जोड़ा कि चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने परिणाम को स्वीकार किया और पार्टी के साथ खड़े रहे, क्योंकि उनके लिए कांग्रेस सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है।

‘मैं कांग्रेस में हूं और कांग्रेस के लिए हूं’

अपने आलोचकों को जवाब देते हुए शशि थरूर ने साफ कहा, “मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं हटा।” उन्होंने कहा कि उनके विचार कांग्रेस की व्यापक सोच के भीतर ही आते हैं और अलग राय रखना पार्टी विरोधी होना नहीं है। थरूर के मुताबिक, कांग्रेस की ताकत हमेशा उसकी विविध आवाज़ें और विचारों की आज़ादी रही है।

सियासत में संतुलन की बात

शशि थरूर का यह पूरा बयान एक ऐसे नेता की तस्वीर पेश करता है, जो राजनीति में संतुलन, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भरोसा करता है। न अंधा विरोध, न अंधी तारीफ—बल्कि मुद्दों पर सोच-समझकर बोलना ही उनकी राजनीति की पहचान बनती जा रही है। शशि थरूर ने यह साफ कर दिया है कि वे कांग्रेस के भीतर रहकर भी स्वतंत्र सोच रखने वाले नेता हैं, और यही बात उन्हें भीड़ से अलग बनाती है—चाहे इससे सियासी बहस क्यों न तेज हो जाए।

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