संजीव कुमार | नई दिल्ली 6 जनवरी 2026
AI की आड़ में महिला खिलाड़ी की इज्जत से खिलवाड़
भारतीय महिला क्रिकेट से जुड़ी उभरती खिलाड़ी प्रतिका रावल इन दिनों क्रिकेट नहीं, बल्कि एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनकी कुछ आपत्तिजनक और कथित तौर पर AI से बनाई गई फर्जी तस्वीरें वायरल होने के बाद प्रतिका का गुस्सा फूट पड़ा है। महिला क्रिकेटर ने साफ शब्दों में AI प्लेटफॉर्म Grok को चेतावनी देते हुए कहा है कि तकनीक के नाम पर किसी की गरिमा, पहचान और सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रतिका रावल के नाम से वायरल हो रही तस्वीरें असली नहीं, बल्कि AI जनरेटेड बताई जा रही हैं। इन तस्वीरों का प्रतिका से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर इन्हें असली बताकर फैलाया गया। इससे न सिर्फ उनकी छवि को नुकसान पहुंचा, बल्कि एक महिला खिलाड़ी के रूप में उनकी मानसिक पीड़ा भी बढ़ी। प्रतिका ने इसे “डिजिटल हिंसा” करार दिया और कहा कि यह आज के दौर में महिलाओं के खिलाफ एक नया लेकिन बेहद खतरनाक हथियार बनता जा रहा है।
‘AI है तो क्या इंसानियत खत्म हो गई?’ – प्रतिका रावल
प्रतिका रावल ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर AI को कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह तकनीक नहीं बल्कि हथियार बन जाएगी। उन्होंने Grok जैसे AI प्लेटफॉर्म को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि वे अपने सिस्टम की जिम्मेदारी लें और ऐसे कंटेंट पर सख्त रोक लगाएं। प्रतिका का कहना था कि “AI इंसानों के लिए है, इंसानों के खिलाफ नहीं।”
महिला खिलाड़ियों के लिए दोहरी लड़ाई
एक तरफ मैदान पर प्रदर्शन की चुनौती और दूसरी तरफ सोशल मीडिया व डिजिटल दुनिया में इज्जत बचाने की लड़ाई—प्रतिका रावल का मामला बताता है कि महिला खिलाड़ियों को आज भी दोहरी जंग लड़नी पड़ती है। खेल में पहचान बनाने वाली महिला क्रिकेटरों को अब ट्रोलिंग, फर्जी तस्वीरों और AI दुरुपयोग का भी सामना करना पड़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
सोशल मीडिया पर समर्थन, कार्रवाई की मांग
प्रतिका रावल के समर्थन में कई खिलाड़ी, खेल प्रशंसक और सामाजिक कार्यकर्ता सामने आए हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे मामलों में AI कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही, कानून को भी तकनीक से एक कदम आगे चलने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि किसी भी महिला की छवि से खिलवाड़ करने वालों को तुरंत सजा मिल सके।
सिर्फ एक खिलाड़ी का मामला नहीं
प्रतिका रावल का यह गुस्सा सिर्फ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि हर उस महिला की आवाज़ है, जो डिजिटल दुनिया में बिना गलती के निशाना बन जाती है। यह मामला साफ संकेत देता है कि AI की तरक्की के साथ-साथ नैतिकता, जवाबदेही और कानून भी उतने ही मजबूत होने चाहिए।
तकनीक अगर बेलगाम हुई, तो सबसे पहले उसकी कीमत इंसान और उसमें भी खासकर महिलाएं चुकाती हैं। प्रतिका रावल की चेतावनी सिर्फ Grok के लिए नहीं, बल्कि पूरे AI इकोसिस्टम के लिए एक गंभीर अलार्म है।




