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बांग्लादेश है हिन्दू-मुसलमान सबका — अगले PM माने जा रहे तारिक रहमान का साफ संदेश

एबीसी डेस्क 25 दिसंबर 2025

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष और देश के अगले प्रधानमंत्री के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे तारिक रहमान ने एक ऐसा संदेश दिया है, जिसने देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि “बांग्लादेश किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं, बल्कि हिन्दू-मुसलमान सहित सभी नागरिकों का साझा देश है।”

क्रिसमस के मौके पर दिए गए इस संदेश को सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि बढ़ते साम्प्रदायिक तनाव के बीच भरोसा लौटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। तारिक रहमान ने यह बात उस समय कही है, जब हाल के महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

इसी क्रम में तारिक रहमान ने देश के अंतरिम शासन से जुड़े प्रमुख चेहरे और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस को भी संदेश भेजा। बताया जा रहा है कि उन्होंने यूनुस से बातचीत में देश में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह संवाद ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश एक निर्णायक राजनीतिक दौर से गुजर रहा है।

तारिक रहमान ने अपने संदेश में कहा कि बांग्लादेश की पहचान उसकी बहुलतावादी संस्कृति से है, जहां धर्म के आधार पर किसी को डरने या खुद को अलग समझने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता की राजनीति अगर समाज को बांटने का काम करे, तो देश कमजोर होता है, और यही गलती दोहराई नहीं जानी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तारिक रहमान का यह बयान आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया एक साफ और सोचा-समझा संदेश है। इसका मकसद न केवल अल्पसंख्यक समुदायों को भरोसा देना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह संकेत देना है कि अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो बांग्लादेश की दिशा समावेशी और लोकतांत्रिक रहेगी। तारिक रहमान लंबे समय तक निर्वासन में रहने के बाद फिर से बांग्लादेश की राजनीति के केंद्र में लौटे हैं। उनकी वापसी और लगातार सक्रियता ने यह संकेत दे दिया है कि BNP आगामी चुनावों में पूरी ताकत से उतरने की तैयारी में है।

ऐसे माहौल में “बांग्लादेश हिन्दू-मुसलमान सबका है” जैसे शब्द केवल नारा नहीं, देश के भविष्य को लेकर एक राजनीतिक और नैतिक घोषणा माने जा रहे हैं — यह घोषणा कि सत्ता चाहे जिसकी हो, देश किसी एक का नहीं, हर उस आदमी का है जो उसे अपना घर मानता है।

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