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अंकिता भंडारी हत्याकांड में फिर भूचाल: ऑडियो, पत्र और बुलडोजर के आरोपों ने हिला दी उत्तराखंड की सियासत

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महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 24 दिसंबर 2025

उत्तराखंड का बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुलग उठा है। 18 दिसंबर 2022 की वह रात, जिसने एक युवा लड़की की जिंदगी छीन ली और पूरे देश को झकझोर दिया, आज भी सवालों के घेरे में है। अदालत से भाजपा नेता के पुत्र समेत तीन दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन क्या यही पूरी सच्चाई है? क्या इस केस में सिर्फ वही तीन चेहरे शामिल थे, या फिर कोई “बड़ा नाम” परदे के पीछे सुरक्षित रहा? शुरू से ही इस हत्याकांड के साथ “VVIP” शब्द जुड़ा रहा, लेकिन जांच एजेंसियां किसी ठोस नाम तक नहीं पहुंच पाईं। अब करीब दो साल बाद सामने आए एक ऑडियो और उससे जुड़े दावों ने फिर से यह आशंका गहरा दी है कि शायद सच्चाई का एक बड़ा हिस्सा अब भी दफन है।

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अंकिता भंडारी हत्याकांड पर नया दावा…. क्या दुष्यंत गौतम थे रहस्यमयी VIP?

ताजा विवाद ज्वालापुर से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित दूसरी पत्नी उर्मिला के बीच हुई बातचीत के वायरल ऑडियो से शुरू हुआ है। इस ऑडियो में सुरेश राठौर कथित तौर पर सीधे तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, राज्यसभा सांसद और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम का नाम लेते सुनाई देते हैं। बातचीत में दावा किया जा रहा है कि जिस रात अंकिता भंडारी की हत्या हुई, उसी रात दुष्यंत गौतम उसी रिजॉर्ट में मौजूद थे। ऑडियो में यह भी कहा गया है कि अनैतिक संबंधों को लेकर विवाद हुआ था, जो आगे चलकर इस जघन्य अपराध की वजह बना। ये दावे अब तक की आधिकारिक जांच और अदालत में सामने आए तथ्यों से बिल्कुल अलग कहानी बयान करते हैं, इसलिए इनकी गंभीरता को हल्के में नहीं लिया जा सकता।


अंकिता भंडारी मर्डर केस में आरोप के बाद पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ का BJP से इस्तीफा

ऑडियो में सुरेश राठौर यहीं नहीं रुकते। वह यह सनसनीखेज दावा भी करते हैं कि भाजपा के एक शीर्ष नेता से जुड़े कई ऑडियो और वीडियो सबूत एक भाजपा नेत्री के पास मौजूद हैं। यह आरोप सीधे-सीधे सत्ता, संगठन और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन जैसे ही यह ऑडियो सार्वजनिक हुआ, उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मच गई। कांग्रेस ने इसे “सत्य को दबाने की साजिश” बताते हुए मामले की दोबारा, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक, हर जगह यही सवाल गूंज रहा है—अगर सब कुछ साफ था, तो फिर ये नए आरोप क्यों?

इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा मोड़ तब आया, जब अंकिता भंडारी केस से जुड़े आरोपों के बीच पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफे की वजह भी वही ऑडियो है, जिसमें सुरेश राठौर ने आरती गौड़ का नाम लिया है। राठौर के अनुसार, दुष्यंत कुमार गौतम से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो आरती गौड़ के पास हैं। यह आरोप सामने आते ही आरती गौड़ पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ा और अंततः उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया। हालांकि, आरती गौड़ की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक सफाई सामने नहीं आई है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

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अंकिता भंडारी हत्याकांड: वायरल ऑडियो और कांग्रेस के आरोपों से फिर गरमाई उत्तराखंड की सियासत

मामले को और भी गंभीर बनाते हुए सुरेश राठौर की कथित दूसरी पत्नी उर्मिला ने एक बेहद चौंकाने वाला आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अंकिता भंडारी की हत्या जिस कमरे में हुई थी, उस पर बुलडोजर चलवाकर सबूत नष्ट किए गए और यह कार्रवाई आरती गौड़ के कहने पर हुई। अगर यह आरोप सही साबित होता है, तो यह सिर्फ हत्या का मामला नहीं रहेगा, बल्कि साक्ष्य मिटाने, जांच को प्रभावित करने और न्याय प्रक्रिया से खिलवाड़ करने का गंभीर अपराध बन जाएगा। उर्मिला अपने आरोपों पर कायम हैं और खुलकर इस पूरे मामले की दोबारा जांच की मांग कर रही हैं।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं रह गया है कि अंकिता भंडारी की हत्या किसने की, बल्कि यह भी है कि क्या उसे पूरा न्याय मिला? क्या किसी रसूखदार चेहरे को बचाने के लिए सच्चाई के साथ समझौता किया गया? जनता, खासकर अंकिता का परिवार और आम लोग, आज भी जवाब चाहते हैं। करना वायरल ऑडियो, लिखित शिकायतें और नए आरोपों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड महज एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि न्याय, सत्ता और जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन चुका है। अब देखना यह है कि सिस्टम इस परीक्षा में खरा उतरता है या फिर सवाल हमेशा की तरह अनुत्तरित ही रह जाते हैं।

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