एबीसी डेस्क 18 दिसंबर 2025
तमिलनाडु की सियासत में इस समय हलचल तेज़ है और इसकी वजह बने हैं फिल्म अभिनेता से नेता बने विजय। अपनी पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) के मंच से विजय ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी सीधी लड़ाई डीएमके से है। इस एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है—क्या विजय वाकई मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बन सकते हैं?
विजय का यह बयान केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि डीएमके के पारंपरिक वोट बैंक को सीधे चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी राजनीति का केंद्र आम आदमी, युवाओं और भ्रष्टाचार से तंग जनता होगी। विजय लगातार यह दोहरा रहे हैं कि वे न तो बीजेपी के साथ हैं और न ही किसी और दल की बी-टीम, उनकी लड़ाई व्यवस्था और डीएमके की नीतियों से है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता, खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं में, डीएमके के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। तमिलनाडु में सिनेमा और राजनीति का पुराना रिश्ता रहा है, और विजय उसी परंपरा में खुद को एक वैकल्पिक चेहरे के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि यह भी सच है कि चुनावी राजनीति में सफलता केवल लोकप्रियता से नहीं, बल्कि संगठन, ज़मीनी नेटवर्क और स्पष्ट एजेंडे से मिलती है—जिसकी अग्निपरीक्षा अभी बाकी है।
डीएमके खेमे में फिलहाल सार्वजनिक प्रतिक्रिया भले ही संयमित हो, लेकिन अंदरखाने चिंता जरूर है कि विजय का उभार विपक्षी वोटों के साथ-साथ डीएमके के कुछ समर्थकों को भी आकर्षित कर सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि विजय की यह राजनीतिक एंट्री सिर्फ शोर तक सीमित रहती है या वाकई तमिलनाडु की सत्ता की राजनीति में बड़ा मोड़ लाती है। फिलहाल इतना तय है कि “मेरा मुकाबला डीएमके से है” कहकर विजय ने सियासी मैदान में सीधी चुनौती जरूर दे दी है।




