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Watch Video वोट चोरी विवाद पर सियासी तूफ़ान—सु्प्रिया श्रीनेत का तीखा वार, अमित शाह की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल

एबीसी डेस्क 10 दिसंबर 2025

लोकसभा में चुनाव प्रक्रिया और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बुधवार को भारी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि डेढ़ घंटे तक सदन में बोलने के बावजूद उन्होंने वोट चोरी पर उठे सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। श्रीनेत का आरोप था कि गृहमंत्री ने गंभीर मुद्दे पर जवाब देने की जगह “सिर्फ बकैती” की और असली सवालों को गोल कर गए। उन्होंने अमित शाह को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे राहुल गांधी की सार्वजनिक बहस (डिबेट) की पेशकश स्वीकार करें। राहुल गांधी ने जैसे ही बहस की चुनौती दी…
मोटा भाई की घबराहट लाइव् टेलिकास्ट हो गई। भरी संसद में दोनों हाथों से सिर खुजाते-खुजाते “साला…” निकल गया मुँह से….

राहुल गांधी ने संसद में कहा था कि
भारत की जनता ये 3 बहुत ज़रूरी है:

1.CJI को EC चयन पैनल से क्यों हटाया?

2.2024 चुनाव से पहले EC को लगभग पूरी कानूनी इम्युनिटी क्यों दी?

3.CCTV फुटेज 45 दिन में नष्ट करने की इतनी जल्दबाज़ी क्यों? जवाब एक ही है – BJP चुनाव आयोग को वोट चोरी करने का औज़ार बना रही है।

सुप्रिया श्रीनेत के बयान ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया, क्योंकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सदन में अमित शाह द्वारा ‘साला’ शब्द का उपयोग करना उनकी बौखलाहट का संकेत था, जबकि सभापति की चुप्पी ने विपक्ष को और नाराज़ कर दिया। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तुरंत ट्रेंड करने लगा और हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि क्या सदन में मर्यादा के मानकों पर दोहरी नीति अपनाई जा रही है? कुछ लोगों ने तर्क दिया कि ‘साला’ शब्द गाली नहीं, बल्कि रिश्ते का संबोधन है—जबकि कई ने कहा कि किसी को संबोधित करते हुए यह शब्द इस्तेमाल करना अमर्यादित ही माना जाएगा।

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ट्वीट के जवाबों में आम जनता से लेकर राजनीतिक समर्थक और विपक्षी आवाज़ें—सबने अपनी राय खुलकर रखी। एक यूज़र ने लिखा कि “चुनाव आयोग बीजेपी का प्रकोष्ठ बन चुका है”, जबकि दूसरे ने तंज कसते हुए कहा कि “इनके पास कोई जवाब नहीं, अब वंदे मातरम या कोई और मुद्दा उठा देंगे।” कुछ प्रतिक्रियाओं ने माहौल को और तीखा बना दिया, जिसमें चुनाव आयोग पर पारिवारिक रिश्तों तक के तंज भी उड़ाए गए।

दूसरी तरफ़ सत्ता पक्ष के समर्थकों ने भी जमकर पलटवार किया। कुछ ने कांग्रेस पर पिछले वर्षों के बयान और आरोप याद दिलाकर कहा कि विपक्ष खुद भ्रम फैलाता है और जवाब मांगने की स्थिति में नहीं है। एक यूज़र ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए लिखा कि “2014 से ईवीएम हैक, राफेल, अडानी-अंबानी, जाति जनगणना—हर बार आरोप लगाकर भाग जाना इनकी आदत है।”

संसद में बढ़े तनाव और सोशल मीडिया पर इस विवाद का उफान यह दिखाता है कि “वोट चोरी” का मुद्दा अब केवल चुनावी आरोप नहीं रहा, बल्कि सत्ता-विरोधी राजनीति के केंद्र में आ चुका है। राहुल गांधी द्वारा दी गई डिबेट की खुली चुनौती ने राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, लेकिन गृहमंत्री इस चुनौती को स्वीकार करते हैं या नहीं—यह अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है।

विवाद का एक और पहलू ‘साला’ शब्द पर उठी बहस थी, जिसने भाषाई मर्यादा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। एक यूज़र ने तर्क दिया कि यह शब्द रिश्ते का है और गाली नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर कई लोग यह मानते हैं कि किसी व्यक्ति को संबोधित करते हुए इसका उपयोग अपमानजनक ही माना जाएगा, खासकर संसद जैसी संवैधानिक गरिमा वाले मंच पर।

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कुल मिलाकर, बुधवार का दिन भारतीय राजनीति में तीखे आरोपों, मर्यादा की बहस, चुनाव प्रक्रिया पर सवालों और जवाब की राजनीति में बीता। विपक्ष का दावा है कि सरकार गंभीर मुद्दों पर चुप है, जबकि सत्ता पक्ष कहता है कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने और आरोप लगाने में व्यस्त है।

यह स्पष्ट है कि “वोट चोरी” का आरोप आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है—और संसद से लेकर सोशल मीडिया तक इसकी गूंज जारी रहेगी।

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