साजिद अली। कोलकाता 9 दिसंबर 2025
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कूचबिहार की एक बड़ी जनसभा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय—भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के रचयिता और बंगाल के महान साहित्यिक आइकन—का अपमान किया है। ममता बनर्जी का ग़ुस्सा इस बात पर था कि लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें “बंकिम दा” कहकर संबोधित किया, जिसे उन्होंने बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा और साहित्यिक गरिमा के खिलाफ बताया। ममता ने कहा कि प्रधानमंत्री देश की स्वतंत्रता के समय पैदा भी नहीं हुए थे और फिर भी वे बंगाल के सबसे बड़े सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक को ऐसे सामान्य और हल्के अंदाज़ में संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे देश से इसके लिए माफ़ी माँगें।
सभा में ममता बनर्जी ने बेहद तीखे स्वर में कहा, “आपने उन्हें वह सम्मान भी नहीं दिया जो उन्हें मिलना चाहिए था। यह बंगाल की संस्कृति का अपमान है, हमारे गौरव का अपमान है। आपको इसके लिए पूरे देश से माफ़ी माँगनी चाहिए।” यह बयान तब आया जब प्रधानमंत्री ने लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर हुई चर्चा के दौरान बंकिमचंद्र का ज़िक्र किया और TMC सांसद सौगत रॉय द्वारा आपत्ति जताए जाने पर तुरंत “बंकिम बाबू” कहने की बात मान ली।
हालाँकि प्रधानमंत्री ने सदन में सौगत रॉय की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा था, “मैं उन्हें बंकिम बाबू कहूँगा। धन्यवाद, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूँ।” लेकिन ममता बनर्जी ने इसे पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी में वह गंभीरता नहीं दिखी, जिसकी अपेक्षा ऐसे महान विभूति का उल्लेख करते समय की जानी चाहिए। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इसे हल्के मज़ाक में बदलकर बंगाल की भावनाओं को और आहत किया, क्योंकि उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा था कि क्या वह सौगत रॉय को अब भी ‘दादा’ कह सकते हैं।
ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को सिर्फ एक संबोधन की गलती नहीं बताया, बल्कि उन्होंने इसे बंगाल की भाषा, संस्कृति और विरासत के खिलाफ बीजेपी की मानसिकता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी कभी बंगाल में सत्ता में आई, तो वह इस राज्य की पहचान, भाषा और कला को मिटा देगी। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने देश के कई हिस्सों में संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को कमजोर किया है, और बंगाल इसका अगला निशाना बन सकता है। ममता ने यह भी कहा कि बंगाल ऐसी किसी भी राजनीतिक ताकत को बर्दाश्त नहीं करेगा जो उसके साहित्यकारों और सांस्कृतिक नायकों के प्रति सम्मान न रखे।
रैली में ममता ने SIR (Special Intensive Revision) को भी चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जैसे ही SIR की अंतिम मतदाता सूची जारी होगी, वैसे ही विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी जाएगी ताकि कोई अदालत में इस प्रक्रिया को चुनौती न दे सके। उनका दावा है कि यह पूरा अभियान राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसका मकसद मतदाता सूची में बदलाव कर चुनावी लाभ उठाना है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और लोकतंत्र को मजबूत करने की अपील की।
ममता बनर्जी की यह बयानबाज़ी बंगाल की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे चुकी है। एक तरफ सत्तारूढ़ TMC इसे बंगाल की अस्मिता का मुद्दा बता रही है, वहीं बीजेपी इसे “अनावश्यक राजनीतिक नाटक” कहकर खारिज कर सकती है। लेकिन इतना तय है कि वंदे मातरम्, बंकिमचंद्र, और बंगाल की सांस्कृतिक पहचान—ये तीनों विषय भावनाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। और यही कारण है कि ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पर यह हमला पूरी रणनीति और पूरी आक्रामकता के साथ बोला है।




