श्रेया चव्हाण। मुंबई 7 दिसंबर 2025
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo के संचालन संकट का आज छठा दिन था, और स्थिति सामान्य होने के बजाय और उलझती दिखी। रविवार को दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर इंडिगो ने 220 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे यात्रियों की परेशानी चरम पर पहुँच गई। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही रद्दीकरण और देरी ने हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएँ, कामकाज, मीटिंग्स, मेडिकल आपात स्थितियाँ और पारिवारिक कार्यक्रम पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिए हैं। कुछ यात्रियों ने रातें एयरपोर्ट पर गुज़ारीं, कई परिवार बच्चे और बुजुर्गों के साथ घंटों लाइनों में फँसे रहे। एयरलाइन ने अपने नेटवर्क को “रीबूट” करने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर संकट जस का तस बना हुआ है।
इंडिगो ने शुक्रवार को अपने कुल 2300 में से लगभग 1600 उड़ानें रद्द कर दी थीं, जो भारतीय विमानन इतिहास की सबसे बड़ी एक दिन की रद्दीकरण घटनाओं में से एक मानी जा रही है। शनिवार को संख्या घटकर लगभग 800 उड़ानें रह गईं, और रविवार को दिल्ली में 109 तथा मुंबई में 112 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। एयरलाइन ने अपने बयान में कहा है कि शुक्रवार को सिर्फ 700 उड़ानों का संचालन ‘नेटवर्क रीस्टार्ट’ के लिए किया गया ताकि शेड्यूल दोबारा पटरी पर लाया जा सके। कंपनी का कहना है कि शनिवार को उसने 1500 उड़ानें संचालित कीं, और स्थिति “धीरे-धीरे सुधर रही है”, लेकिन टर्मिनल 1 और 2 में यात्रियों की जमी भीड़ और लंबी शिकायत कतारें इससे उलट तस्वीर बयान कर रही हैं।
विमानन नियामक DGCA ने संकट की गंभीरता को देखते हुए इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स और COO पोरकेरस को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि यह बड़ी विफलता प्लानिंग, सुपरविजन और रिसोर्स मैनेजमेंट में गंभीर कमी का संकेत है। DGCA ने स्पष्ट किया कि मुख्य समस्या एयरलाइन द्वारा नए FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियमों के हिसाब से पर्याप्त संसाधन, पायलट और क्रू रोस्टर्स की तैयारी न करना है। नए FDTL नियम लागू होने के बाद से इंडिगो के पायलट असंतोष, ओवरवर्क और थकावट के मुद्दे लगातार सामने आ रहे थे, और अब यह संकट एक बड़े ऑपरेशनल कोलैप्स की तरह उभर आया है।
केंद्र सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. रममोहन नायडू ने DGCA प्रमुख, मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और इंडिगो के CEO के साथ एक “गंभीर समीक्षा बैठक” की। बैठक में स्पष्ट कहा गया कि इंडिगो को जल्द से जल्द सामान्य उड़ान संचालन बहाल करना होगा, सभी यात्रियों को रिफंड समय पर देना अनिवार्य होगा, और एयरलाइन को FDTL नियमों का पालन तय समय सीमा में करना ही होगा। मंत्रालय ने बढ़ते किरायों को नियंत्रित करने के लिए एयरफेयर कैप लगाने और जरूरत पड़ने पर विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला भी किया ताकि यात्रियों की कठिनाई कम हो सके।
सरकार ने DGCA के भीतर एक चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें वरिष्ठ फ्लाइट ऑपریشن इंस्पेक्टर्स और जॉइंट DG स्तर के अधिकारी शामिल हैं। यह समिति 15 दिनों में अपनी विस्तृत रिपोर्ट देगी, जिसमें ऑपरेशनल विफलता के कारण, सिस्टम की कमजोरियाँ, प्रबंधन की जिम्मेदारियाँ और आगे की नियामकीय कार्रवाई की सिफारिशें शामिल होंगी। सरकार के सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर एयरलाइन और उसके शीर्ष प्रबंधन पर कड़े दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
उधर, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे अन्य बड़े शहरों में भी इंडिगो के रद्दीकरण का प्रभाव दिखा। हैदराबाद में सिर्फ रविवार को 115 उड़ानें रद्द हुईं, जिससे पाँच दिनों में रद्द उड़ानों की संख्या 500 से ऊपर पहुँच गई। कई एयरपोर्ट्स पर बोर्डिंग काउंटरों में अफरा-तफरी का माहौल रहा, यात्री अपने प्रस्थान समय, रिफंड और रीबुकिंग को लेकर कतारों में फँसे रहे। सोशल मीडिया पर यात्रियों के वीडियो वायरल हुए जिनमें लोग एयरलाइन के स्टाफ की अनुपलब्धता और असहयोग को लेकर शिकायत कर रहे थे।
इंडिगो की ऑन-टाइम परफॉर्मेंस पहले ही 8.5% तक गिर चुकी है—जो किसी भी बड़ी एयरलाइन के लिए बेहद खराब स्तर माना जाता है। यह स्थिति न केवल इंडिगो बल्कि पूरे भारतीय विमानन सेक्टर की विश्वसनीयता को चुनौती देती है, क्योंकि एक एयरलाइन की विफलता का असर पूरे नेटवर्क, स्लॉट मैनेजमेंट, एयरपोर्ट सेवाओं और अन्य एयरलाइनों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर FDTL के दबाव में पायलटों की थकावट और एयरलाइन की रणनीतिक कमी इस संकट के मूल कारण हैं, तो यह भारतीय विमानन में “पायलट-वर्कलोड मैनेजमेंट” मॉडल पर बड़ा सवाल है।
संकट का एक बड़ा असर यात्रियों पर पड़ा है, जिनमें वृद्ध, महिलाएँ, छोटे बच्चे, विदेश यात्राएँ करने वाले और जरूरी अपॉइंटमेंट वाले लोग शामिल हैं। कई यात्रियों ने शिकायत की कि उन्हें एयरलाइन से जानकारी देर से मिली, रिफंड प्रक्रिया अस्पष्ट है, और हेल्पलाइन पर संपर्क मुश्किल हो गया है। एयरलाइन के लिए यह न सिर्फ ऑपरेशनल संकट है, बल्कि इसकी विश्वसनीयता और ब्रांड छवि के लिए भी एक बड़ा झटका है।
इंडिगो भारत की सबसे बड़ी और आर्थिक रूप से सबसे मजबूत एयरलाइन है—लेकिन यह संकट यह दिखाता है कि विशाल बेड़े और विशाल नेटवर्क के बावजूद योजनागत कमजोरी या क्रू मैनेजमेंट की गड़बड़ियाँ पूरे ढाँचे को कुछ ही दिनों में ठप कर सकती हैं। अब सबकी निगाहें DGCA की आगामी कार्रवाई, जांच समिति की रिपोर्ट और एयरलाइन के अगले कदमों पर टिकी हैं।




