अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/तेहरान | 30 मई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी जल्द हटाई जा सकती है और दोनों देशों के बीच समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लेकिन ट्रंप के इस दावे पर ईरान ने तुरंत ठंडा पानी डालते हुए साफ कर दिया कि अभी किसी अंतिम समझौते से वह “कोसों दूर” है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं।
व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक से पहले ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी देनी होगी, होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल और बाधा के खोलना होगा तथा समुद्री मार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जा सकती है और फंसे जहाज अपने घर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
हालांकि तेहरान ने ट्रंप के कई दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया। ईरानी सूत्रों और सरकारी मीडिया ने संकेत दिया कि परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम भंडार और प्रतिबंधों में राहत जैसे सबसे संवेदनशील मुद्दों पर अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। ईरान लगातार कहता रहा है कि शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम उसका संप्रभु अधिकार है और वह अपने सभी रणनीतिक हितों से पीछे नहीं हटेगा।
दरअसल दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच एक प्रारंभिक समझौता मसौदा तैयार होने की खबरें सामने आई हैं। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध समुद्री आवाजाही बहाल करने, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव कम करने और 60 दिन के विस्तारित युद्धविराम पर चर्चा हुई है। लेकिन ट्रंप की अंतिम मंजूरी और ईरान की औपचारिक सहमति अभी बाकी है।
सबसे बड़ा विवाद ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करे या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंप दे। वहीं ईरान इस मुद्दे पर अधिक सुरक्षा गारंटी, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सैन्य दबाव कम करने की मांग कर रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्वीकार किया है कि समझौता करीब है, लेकिन अभी कई जटिल तकनीकी और राजनीतिक सवालों का समाधान होना बाकी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। पिछले महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव, नाकाबंदी और जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया था। इसी कारण दुनिया की निगाहें इस संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश करना चाहते हैं, जबकि ईरान बिना ठोस रियायतें हासिल किए किसी जल्दबाजी में नहीं दिख रहा। यही वजह है कि एक तरफ वॉशिंगटन “डील करीब” होने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ तेहरान बार-बार कह रहा है कि केवल बयान नहीं, जमीन पर कार्रवाई ही असली भरोसा पैदा करेगी।
फिलहाल स्थिति यह है कि न तो नाकाबंदी पूरी तरह हटी है और न ही परमाणु विवाद सुलझा है। ऐसे में ट्रंप के दावों और ईरान की सख्त प्रतिक्रिया के बीच यह साफ दिखाई देता है कि समझौते की राह अभी भी कठिन और अनिश्चित बनी हुई है।




