अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 30 मई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच कई सप्ताह से चल रही कूटनीतिक रस्साकशी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक कर ईरान से संभावित समझौते पर अंतिम फैसला लेंगे। इस बैठक को मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि समझौते के लिए ईरान को कुछ स्पष्ट शर्तें स्वीकार करनी होंगी। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत पूरी तरह खोलना होगा, जहाजों से किसी प्रकार का टोल नहीं लिया जाएगा और समुद्री मार्ग में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों को हटाना होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को नष्ट किया जाएगा।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान ने ट्रंप की इन शर्तों को स्वीकार किया है या नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में नष्ट किया जाएगा। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल किसी प्रकार का आर्थिक भुगतान या राहत पैकेज नहीं दिया जाएगा।
इससे पहले अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच एक प्रारंभिक सहमति पत्र (Memorandum of Understanding) तैयार होने की खबर सामने आई थी। इस मसौदे के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना किसी रोक-टोक के समुद्री यातायात बहाल किया जाएगा और ईरान 30 दिनों के भीतर समुद्री मार्ग से बारूदी सुरंगें हटाएगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी समाप्त करेगा और तेल निर्यात से जुड़ी कुछ पाबंदियों में ढील देगा।
हालांकि सबसे जटिल मुद्दा अभी भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। प्रस्तावित समझौते के तहत इस विषय पर अगले 60 दिनों के युद्धविराम काल में विस्तृत बातचीत जारी रखने की योजना है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि पहले तनाव कम किया जाए और उसके बाद परमाणु कार्यक्रम के तकनीकी और राजनीतिक पहलुओं पर व्यापक सहमति बनाई जाए।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच समझौता काफी करीब पहुंच चुका है, लेकिन अभी अंतिम मंजूरी बाकी है। उनके अनुसार सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम का क्या होगा और उसे किस प्रक्रिया के तहत नष्ट किया जाएगा। यही वह बिंदु है जिस पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
दूसरी ओर ईरान लंबे समय से यह कहता आया है कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन उसका संप्रभु अधिकार है और इस अधिकार से वह पीछे नहीं हटेगा। यही कारण है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत सबसे कठिन चरण में प्रवेश कर चुकी है।
यदि ट्रंप इस समझौते को मंजूरी दे देते हैं तो इससे न केवल मध्य पूर्व में सैन्य तनाव कम हो सकता है बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी बड़ी राहत मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके खुलने से तेल की कीमतों में स्थिरता आने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है।
अब पूरी दुनिया की निगाहें व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम पर टिकी हैं, जहां ट्रंप की अंतिम मंजूरी यह तय करेगी कि अमेरिका और ईरान टकराव के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे या कूटनीति और समझौते के नए अध्याय की शुरुआत होगी।




