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लखनऊ में छात्रा पर जानलेवा हमला, 11 दिन बाद भी FIR नहीं—योगी सरकार की महिला सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

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अनिल यादव । लखनऊ 3 दिसंबर 2025

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आई इस दर्दनाक और चिंता बढ़ाने वाली घटना ने पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। 23 नवंबर 2025 की रात लगभग 11:30 बजे हजरतगंज के पॉश इलाके में 22 वर्षीय बीए थर्ड ईयर की छात्रा शालिनी चौरसिया के कमरे में पाँच–छह युवक दरवाज़ा तोड़कर घुस आए। अंदर घुसते ही उन्होंने पहले फब्तियाँ कसनी शुरू कीं और जब शालिनी ने विरोध किया तो गाली-गलौज के साथ बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। बदमाशों ने चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और करीब आधे घंटे तक कमरे में बंद करके छात्रा पर अत्याचार करते रहे। शालिनी की चीखें सुनकर पड़ोसी दौड़े और तब जाकर आरोपी मौके से फरार हुए। पड़ोसियों ने शालिनी की रोने-चीखने की आवाज़ें अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लीं, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और जनता में आक्रोश भड़का रही हैं।

घटना के बाद खून से लथपथ शालिनी तत्काल हजरतगंज थाने पहुंचीं और लिखित शिकायत दी। मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि हुई—सिर, पीठ, हाथ व पैरों पर गहरे घाव दर्ज किए गए। यह मामला IPC की धारा 452, 323, 504, 506, 354 और 354घ के तहत गंभीर आपराधिक अपराध बनता है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 11 दिन बीत जाने के बाद भी हजरतगंज पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़िता रोज़ थाने का चक्कर लगाकर सिर्फ बहाने सुन रही है—“कल आना”, “इंक्वायरी चल रही है”, “तहरीर में कमी है।” पीड़िता ने SSP लखनऊ, CM पोर्टल और ऑनलाइन शिकायतों के माध्यम से मदद माँगी, लेकिन कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। थाने के बाहर रोते हुए उनका वायरल वीडियो पूरे प्रदेश में हलचल पैदा कर चुका है, जिसमें वह कहती हैं—“क्या यूपी में लड़कियाँ सुरक्षित नहीं? क्या इसलिए FIR नहीं हो रही क्योंकि एक आरोपी खुद को किसी नेता का करीबी बताता है?”

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्य आरोपी राजा भैया उर्फ़ राजवर्धन सिंह इलाके में दादागीरी करता है और “नेताजी का फोन आएगा” कहकर पुलिस को बार-बार धमकाता है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि थाने में तैनात एक सिपाही और आरोपी के बीच नज़दीकी संबंध हैं, जिसकी वजह से पुलिस मामले को दबाने में लगी है। इस घटना ने योगी सरकार की उन सभी योजनाओं—जैसे “मिशन शक्ति”, “महिला हेल्पलाइन 1090” और “सेफ सिटी प्रोजेक्ट”—की पोल खोल दी है, जिनका दावा किया जाता है कि यूपी में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। लेकिन जब राजधानी के बीचोबीच एक छात्रा के साथ ऐसी जघन्य घटना हो जाए और पुलिस 11 दिन तक FIR तक दर्ज न करे, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि फिर सामान्य नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?

सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से तूल पकड़ चुका है। #ShaliniChaurasiyaJustice, #GundaRajInUP, #UPPoliceShame और #YogiRajFailed जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जिन हजारों एनकाउंटर्स का ढिंढोरा पीटा जाता रहा, जिन गुंडों की लिस्टें दिखाई गईं—उनका क्या फायदा, जब एक 22 वर्षीय छात्रा के मामले में पुलिस FIR दर्ज करने से भी डरती हो? क्या यह वही उत्तर प्रदेश है जिसे “गुंडाराज मुक्त” बनाने का वादा किया गया था? क्या अब राजधानी की लड़कियाँ भी नेताओं के संरक्षण में पल रहे गुंडों से असुरक्षित हैं?

शालिनी चौरसिया अब भी इंसाफ की उम्मीद में दर-दर भटक रही हैं। उनका सवाल सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे राज्य की बेटियों की आवाज़ है—“अगर राजधानी में मेरे साथ यह हुआ और FIR भी नहीं लिखी, तो आम लड़कियाँ क्या करेंगी? किससे उम्मीद रखेंगी?” यह घटना योगी सरकार और यूपी पुलिस के लिए एक चेतावनी है कि अगर कानून-व्यवस्था की ज़मीनी हकीकत नहीं बदली, तो महिलाओं की सुरक्षा केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह जाएगी। UP की जनता और बेटियाँ अब जवाब मांग रही हैं—और इस बार उन्हें चुप नहीं कराया जा सकेगा।

#JusticeForShalini #UPPoliceShame #WomenSafetyInUP #LucknowAssaultCase

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