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नेशनल एजुकेशन डे: कांग्रेस बोली—भारत की हर कक्षा में गूंजती है मौलाना आज़ाद की विरासत

नेशनल एजुकेशन डे के मौके पर कांग्रेस ने देश के पहले शिक्षा मंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को याद करते हुए कहा कि भारत की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की नींव जिस दूरदृष्टि और वैचारिक मजबूती पर खड़ी है, वह मौलाना आज़ाद की देन है। कांग्रेस ने कहा कि आज का दिन सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा को सशक्त और समावेशी बनाने की उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान करने का दिन है।

कांग्रेस ने अपने संदेश में कहा कि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एक सच्चे विज़नरी थे—एक ऐसे नेता, जिन्होंने आज़ादी के तुरंत बाद हिंदुस्तान के भविष्य को संवारने के लिए शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का केंद्रबिंदु बनाया। उन्होंने वैज्ञानिक सोच, सामाजिक समरसता और आधुनिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा दिया। कांग्रेस ने कहा कि भारत की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं की नींव में मौलाना आज़ाद का योगदान अमिट रूप से दर्ज है।

पार्टी ने कहा कि मौलाना आज़ाद की विरासत आज भी देशभर के शिक्षकों, प्रोफेसरों और शिक्षाविदों के माध्यम से जीवित है, जो लाखों विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशित करते हुए राष्ट्र को मजबूत बना रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का प्रसार नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने की शक्ति है—और यही दर्शन मौलाना आज़ाद ने भारत को दिया।

कांग्रेस ने अंत में कहा कि नेशनल एजुकेशन डे हमें यह याद दिलाता है कि मजबूत, प्रगतिशील और समावेशी भारत की नींव शिक्षा से ही गुज़रती है—और मौलाना आज़ाद इस नींव के सबसे ऊंचे स्तंभों में से एक हैं।

 

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