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कांग्रेस : रिमोट कंट्रोल मोदी के पास, नीतीश सिर्फ कठपुतली

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नई दिल्ली 31 अक्टूबर 2025

 बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए गठबंधन पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बिहार में इस बार एनडीए सरकार पूरी तरह भ्रम और असमंजस की स्थिति में चुनाव लड़ रही है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा, “रिमोट कंट्रोल प्रधानमंत्री के हाथ में है, और वे नीतीश कुमार को रिमोट से चला रहे हैं। अगर सच में नीतीश कुमार उनके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, तो प्रधानमंत्री खुद क्यों नहीं यह बात सार्वजनिक रूप से कह रहे कि वे ही एनडीए के सीएम फेस हैं? वह सिर्फ इतना कहते हैं कि हम उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं। यह बयान अपने आप में इस बात का सबूत है कि न तो उनके पास कोई स्पष्ट नीति है और न ही कोई ठोस विजन।”

कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री और नीतीश कुमार दोनों जानते हैं कि बिहार की जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है। राज्य के मतदाता अब रोजगार, किसान और शिक्षा के मुद्दों पर जवाब चाहते हैं। उन्होंने कहा, “बिहार की जनता अब विकास चाहती है, दिखावे की राजनीति नहीं। नीतीश कुमार का राजनीतिक कद अब सिर्फ रिमोट की डोरी पर टिका हुआ है। केंद्र की सत्ता जब चाहती है उन्हें आगे कर देती है, और जब चाहती है किनारे कर देती है। ऐसी स्थिति में जनता उन्हें कैसे भरोसेमंद माने?” उन्होंने आगे कहा कि एनडीए के पास कोई एजेंडा नहीं है, कोई ठोस कार्यक्रम नहीं है, इसलिए वह भ्रम और भय की राजनीति के सहारे चुनाव मैदान में उतरी है।

जयराम रमेश ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ बिहार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “हम पिछले छह महीनों से लगातार पूछ रहे हैं कि प्रधानमंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ क्यों रोक दिया? क्या इसकी वजह अमेरिका का दबाव था? ट्रंप ने हमारे देश पर 56 बार बयान दिए, लेकिन प्रधानमंत्री ने एक बार भी संसद के अंदर या बाहर इस पर कुछ नहीं कहा। हमारे युवा आज बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं, विदेशों में भारतीय नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, एच-1बी वीजा रद्द किए जा रहे हैं, और एनआरआई को हथकड़ियाँ लगाकर वापस भेजा जा रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री चुप हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार विदेश नीति को भी प्रचार का साधन बना चुकी है और जब राष्ट्रीय हितों पर सवाल उठता है तो वह मौन साध लेती है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “ये वही ट्रंप हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री कभी गले लगाने में पीछे नहीं रहते थे, लेकिन जब भारत की गरिमा और हित पर चोट हुई, तब वही प्रधानमंत्री चुप्पी साध गए। विपक्षी नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तो धमकाने में वह कभी पीछे नहीं रहते, लेकिन जब कोई विदेशी नेता भारतीय नागरिकों के अपमान की बात करता है, तब प्रधानमंत्री आत्मसमर्पण की मुद्रा में दिखते हैं। यही दोहरा चरित्र अब देश की जनता समझ चुकी है।” जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री अब मंचों से ‘मंगलसूत्र’ और ‘मुजरा’ जैसे विषयों पर भाषण दे रहे हैं, जबकि देश में बेरोजगारी चरम पर है, किसानों की स्थिति लगातार खराब हो रही है और युवाओं के पास भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के पास अब कोई जवाब नहीं बचा, इसलिए वह भावनाओं और धर्म की राजनीति का सहारा ले रहे हैं।”

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बिहार में इस बार जनता पूरी तरह से महागठबंधन के साथ है और चुनावी माहौल से साफ झलकता है कि बदलाव की बयार चल चुकी है। उन्होंने कहा कि एनडीए बिना किसी विज़न और विकास के एजेंडे के चुनाव लड़ रही है। “जनता अब यह समझ चुकी है कि झूठे वादों और प्रचार पर राजनीति ज्यादा दिन नहीं टिक सकती। बिहार की जनता ने अब निर्णायक फैसला ले लिया है कि 2025 में महागठबंधन की सरकार बनेगी, और यह बदलाव बिहार के लिए नई दिशा लेकर आएगा,” उन्होंने कहा।

 जयराम रमेश ने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं बल्कि विचार परिवर्तन का चुनाव है। “अब बिहार को ऐसी सरकार चाहिए जो किसानों, मजदूरों, शिक्षकों और नौजवानों की आवाज बने, न कि ऐसी सरकार जो सिर्फ रिमोट से चलती हो। यह चुनाव इस बात का फैसला करेगा कि बिहार की राजनीति दिल्ली से नियंत्रित होगी या जनता के दिल से संचालित होगी,” उन्होंने कहा।

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