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वाराणसी में मवेशी तस्करी का खुलासा: बिहार चुनाव से पहले साजिश की गंध?

वाराणसी 30 अक्टूबर 2025

वाराणसी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मवेशी तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार कर 35 मवेशी और 6 बोलेरो वाहन बरामद किए हैं। ये सभी मवेशी सुल्तानपुर से बिहार ले जाए जा रहे थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोशन कुमार, दीपू धुरिया, संजीत कुमार यादव, मनोज कुमार निषाद, गुलशन निषाद, ईशु कुमार, अभिषेक कुमार, उपेंद्र यादव, दीपक कुमार, सुरेश यादव और निखिल धुरिया के रूप में हुई है। सभी पर पशु क्रूरता अधिनियम और तस्करी से संबंधित गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और बड़े पैमाने पर मवेशियों की तस्करी कर उन्हें बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाता था। बरामद बोलेरो वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाए गए थे ताकि पुलिस जांच से बचा जा सके।

अब सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है —क्या ये मवेशी बिहार चुनाव के दौरान सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने या राजनीतिक तनाव फैलाने के लिए ले जाए जा रहे थे?

पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह पूरा नेटवर्क किसी बड़े राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा तो नहीं।

जानकारों का कहना है कि चुनावी मौसम में ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल धार्मिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है। इसलिए प्रशासन इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशीलता के साथ देख रहा है।

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इनके पीछे छिपे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। अब देखना यह है कि क्या इस खुलासे पर तथाकथित “गोदी मीडिया” उतनी ही जोरदार बहस करेगी, जितनी वह किसी बयान या पोस्टर पर करती है — या फिर यह मामला भी चुप्पी के अंधेरे में दब जाएगा। सच्चाई यह है कि अगर ये मवेशी सचमुच चुनावी नफरत का ईंधन बनाने के लिए ले जाए जा रहे थे, तो यह न सिर्फ कानून का अपराध है, बल्कि लोकतंत्र के प्रति अपराध है।

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