वाशिंगटन / पूर्वी प्रशांत महासागर, 29 अक्टूबर 2025
अमेरिका ने पूर्वी प्रशांत महासागर में कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल चार नौकाओं पर घातक हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने इसे “नार्कोट्रैफिकिंग के खिलाफ आवश्यक सैन्य कार्रवाई” बताया है, जबकि इस अभियान ने वैश्विक स्तर पर कानूनी और मानवीय बहस को जन्म दे दिया है। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इन नावों की गतिविधियों को कोलंबिया से मेक्सिको की दिशा में जाते हुए ट्रैक किया था।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने बयान जारी करते हुए कहा कि “ये नावें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में थीं और ड्रग कार्टेल्स के नेटवर्क का हिस्सा थीं।” उन्होंने इसे नशे के व्यापार के खिलाफ “तेज और निर्णायक कार्रवाई” बताया। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य विमानों ने चार नावों को निशाना बनाया और सभी को सटीक मिसाइल हमलों से नष्ट कर दिया। हमले के बाद समुद्र में गिरे एकमात्र जीवित व्यक्ति को मैक्सिकन कोस्ट गार्ड ने बचाया और उसे हिरासत में ले लिया। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मारे गए लोग किस देश के नागरिक थे, लेकिन अनुमान है कि अधिकांश दक्षिण अमेरिकी देशों से थे।
हालांकि, इस पूरे अभियान पर अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि अमेरिका ने बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया या वैश्विक अनुमति के सीधे घातक कार्रवाई की है, जो “अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांत” का उल्लंघन है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिका की “War on Drugs” नीति की नई और अधिक आक्रामक दिशा को दर्शाता है — जहां नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब पुलिस या खुफिया कार्रवाई से आगे बढ़कर पूरी तरह सैन्य शक्ति के सहारे लड़ी जा रही है।
इस कार्रवाई के राजनीतिक परिणाम भी दूरगामी हो सकते हैं। लैटिन अमेरिकी देशों, खासकर कोलंबिया, वेनेजुएला और मेक्सिको, ने कहा है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो क्षेत्र में समुद्री संघर्ष और राजनयिक तनाव बढ़ सकते हैं। मेक्सिको ने इसे “एकतरफा कार्रवाई” करार देते हुए कहा कि किसी भी समुद्री ऑपरेशन के लिए प्रभावित देशों से समन्वय जरूरी है। वहीं अमेरिका का तर्क है कि “नशे की अवैध आपूर्ति श्रृंखला” को तोड़ने के लिए सख्त कदम आवश्यक हैं, क्योंकि इससे न केवल अमेरिकी युवाओं की मौतें बढ़ रही हैं बल्कि संगठित अपराध को भी बढ़ावा मिल रहा है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह केवल “पहला चरण” है और भविष्य में ऐसे कई ऑपरेशन जारी रह सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इन नावों के ज़रिए हर साल अरबों डॉलर के नशीले पदार्थ अमेरिका और यूरोप में पहुंचते हैं, जिनका इस्तेमाल हथियारों, मानव तस्करी और आतंकी गतिविधियों में भी किया जाता है। हालाँकि, स्वतंत्र विश्लेषकों का कहना है कि इन अभियानों से हिंसा तो बढ़ेगी, लेकिन ड्रग तस्करी खत्म नहीं होगी क्योंकि यह समस्या “गरीबी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण” की जड़ों से जुड़ी है।
पूर्वी प्रशांत महासागर में हुआ यह हमला अब केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं रह गया है — यह अमेरिका की नई नीति का संकेत है, जिसमें अब ड्रग तस्करी को केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि “राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे” के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले समय में अमेरिका नशीली वस्तुओं के खिलाफ लड़ाई के नाम पर दूसरे देशों के समुद्री और हवाई क्षेत्र में सीधे हमले कर सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री अधिकार और वैश्विक सुरक्षा संतुलन — तीनों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिका का यह कदम अपने भीतर कई परतें रखता है — सैन्य शक्ति का प्रदर्शन, नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर प्रहार, और साथ ही वैश्विक मंच पर अपनी सुरक्षा नीति को कठोर बनाने की कोशिश। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या 14 संदिग्धों की मौत से वास्तव में ड्रग माफिया का तंत्र कमजोर होगा या यह सिर्फ एक और “प्रतीकात्मक युद्ध” बनकर रह जाएगा।




