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इंटर्न डॉक्टर नहीं बंधुआ मजदूर— सुप्रीम कोर्ट का NMC को दो हफ्ते में स्टाइपेंड देने का आदेश

नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2025

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में मेडिकल इंटर्न्स को स्टाइपेंड का भुगतान सुनिश्चित करने में विफल रहने पर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को कड़ी फटकार लगाते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसमें दो हफ्तों के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस चूक को “गहराई से चिंताजनक” और “अनुचित” करार दिया, विशेष रूप से तब जब युवा डॉक्टर 18 घंटे से अधिक के लंबे और थका देने वाले कार्यघंटे झेल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इंटर्न्स को स्टाइपेंड मिलना उनका “न्यूनतम अधिकार” है। शीर्ष अदालत ने एनएमसी की निष्क्रियता पर गहरा असंतोष जताते हुए कड़े शब्दों में कहा कि, “एनएमसी का आचरण निंदनीय है,” क्योंकि स्टाइपेंड का भुगतान लंबे समय से कोर्ट के समक्ष लंबित है, फिर भी एनएमसी गंभीरता से कदम नहीं उठा रहा है, और अदालत ने मजबूरी में यह टिप्पणी करने की बात कहते हुए एनएमसी को “नींद से जागने” की सख्त चेतावनी दी है। 

यह मामला भारतीय और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह से संबंधित है, जो विभिन्न मेडिकल कॉलेजों द्वारा इंटर्नशिप स्टाइपेंड में देरी या पूर्ण रूप से इनकार करने के अन्यायपूर्ण रवैये के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रहे हैं, जहां इंटर्न्स की ओर से वकील तन्वी दुबे ने बार-बार आश्वासनों के बावजूद स्टाइपेंड से वंचित रखे जाने के तर्क को दोहराते हुए मामले के शीघ्र और अंतिम समाधान की मांग की है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई, विशेषकर 15 सितंबर 2023 के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट न होने और 11 जुलाई 2025 के एनएमसी नोटिस के भी जमीनी स्तर पर लागू न होने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया, जिससे यह इंगित होता है कि पहले के निर्देशों की अवहेलना अदालत की अवमानना है। 

अपने सख्त निर्देश में, कोर्ट ने एनएमसी को दो हफ्तों के भीतर एक शपथ-पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से 11 जुलाई 2025 के नोटिस के पूर्ण अनुपालन की स्थिति, सभी इंटर्न्स को स्टाइपेंड सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए ठोस कदमों का विवरण, और उन मेडिकल कॉलेजों/संस्थानों की पूरी सूची शामिल हो जिन्होंने नोटिस में उल्लिखित विवरण प्रकाशित किए हैं। 

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के उपस्थित होने के बावजूद, न्यायालय ने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव को एनएमसी के अनुपालन की जिम्मेदारी सौंपी है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि न्यायिक निगरानी अब उच्च प्रशासनिक स्तर पर जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युवा डॉक्टरों को उनका जायज पारिश्रमिक समय पर मिले और एनएमसी अपनी नियामक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से पूरा करे।

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