बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मंगलवार को पटना के गांधी मैदान में महागठबंधन ने जब अपना 32 पेज का घोषणा पत्र — ‘बिहार का तेजस्वी प्रण पत्र’ जारी किया, तो सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मच गई। यह केवल एक मेनिफेस्टो नहीं बल्कि एक राजनीतिक दस्तावेज की तरह पेश किया गया — जिसमें रोजगार, महिला सशक्तिकरण, बिजली, किसान कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के वादों के साथ-साथ एक ‘नया बिहार’ गढ़ने का सपना बुना गया है।
तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से गठबंधन का मुख्यमंत्री पद का चेहरा और मुकेश साहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित करते हुए महागठबंधन ने यह संदेश दिया कि उनका गठजोड़ केवल “सत्ता विरोध” नहीं, बल्कि “विजन आधारित विकल्प” है। गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में हजारों की भीड़ उमड़ी, और मंच पर जब तेजस्वी ने घोषणा पत्र की प्रति उठाई, तो तालियों की गड़गड़ाहट ने माहौल को चुनावी जोश से भर दिया।
‘तेजस्वी प्रण पत्र’ – वादों का पुलिंदा नहीं, बिहार का खाका
महागठबंधन के इस मेनिफेस्टो में कई ऐसे वादे हैं जो सीधे जनता के दिल को छूते हैं। सबसे बड़ा ऐलान – हर परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी का। तेजस्वी ने दावा किया कि उनकी सरकार बनते ही पहले 20 दिनों के भीतर एक विधेयक लाकर इस योजना को कानूनी रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “ये वादा नहीं, गारंटी है। बेरोजगारी को जड़ से मिटाना अब बिहार का लक्ष्य होगा।”
पहले साल 10 लाख नौकरियां सृजित करने का वादा करते हुए उन्होंने बेरोजगारी दर को 40% से घटाकर 5% लाने की घोषणा की।
दूसरा बड़ा वादा महिलाओं से जुड़ा है। हर महिला को ₹2500 मासिक भत्ता, पंचायतों में 60% आरक्षण और जीविका दीदियों को स्थायी सरकारी नौकरी देने की बात कही गई है। मुकेश साहनी ने कहा, “अब बिहार की मां-बहनें सिर्फ मतदाता नहीं, बल्कि राज्य की असली मालिक बनेंगी।”
फ्री बिजली, शिक्षा-स्वास्थ्य और किसानों की कर्जमाफी का पैकेज
गठबंधन ने हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने और बिजली बिलों में 50% तक राहत देने का वादा किया है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट ग्रिड नेटवर्क बनाने की योजना भी इस दस्तावेज़ में शामिल है।
किसानों के लिए दो लाख रुपए तक की कर्ज माफी, MSP की कानूनी गारंटी, और एक लाख करोड़ रुपए का सिंचाई फंड बनाने की घोषणा की गई है। सीपीआई (एमएल) नेता दीपंकर भट्टाचार्य ने इसे “किसान क्रांति का रोडमैप” बताया।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर गठबंधन ने विशेष ज़ोर दिया है। हर जिले में मेडिकल कॉलेज, मुफ्त दवा वितरण केंद्र और सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने का वादा किया गया। लड़कियों को मुफ्त साइकिल और लैपटॉप, तथा ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली जैसे वादे भी ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ में शामिल हैं।
‘वक्फ बिल’ पर महागठबंधन का रुख – मुस्लिम वोटरों के लिए बड़ा संदेश
मेनिफेस्टो में एक विशेष पंक्ति ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा — “वक्फ बिल 2024 को लागू नहीं होने दिया जाएगा, मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए गठबंधन प्रतिबद्ध है।” यह घोषणा न केवल अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है, बल्कि NDA द्वारा समर्थित बिल के खिलाफ़ एक स्पष्ट वैचारिक रुख भी है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे मुस्लिम मतदाताओं में गठबंधन के प्रति भरोसा और मजबूत हो सकता है।
विकास का नया नक्शा: एक्सप्रेस-वे, IT पार्क और शिक्षा सिटी
‘तेजस्वी प्रण पत्र’ केवल सामाजिक वादों तक सीमित नहीं रहा। इसमें बिहार को “उद्योग और रोजगार का नया केंद्र” बनाने के लिए पांच नए एक्सप्रेस-वे, IT पार्क, SEZ और एजुकेशन सिटी के निर्माण की घोषणा की गई है। पटना को “सिलिकॉन वैली ऑफ ईस्ट इंडिया” बनाने की परिकल्पना रखी गई है। युवाओं के लिए पांच लाख फ्री स्किल ट्रेनिंग और स्टार्टअप लोन स्कीम का भी प्रावधान है।
NDA पर ‘तेजस्वी तीर’: “20 साल लूट, अब 20 महीने में बदलाव”
तेजस्वी यादव ने मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “NDA ने 20 सालों में बिहार को बेरोजगारी, पलायन और गरीबी दी। अब हम 20 महीनों में वो कर दिखाएंगे जो वे दो दशकों में नहीं कर पाए।” उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर “जुमलों की राजनीति” हुई, और जनता अब सब जान चुकी है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी तीखा प्रहार करते हुए कहा, “हमने सबसे पहले सीएम फेस घोषित किया, सबसे पहले मेनिफेस्टो जारी किया। NDA का जुमला बनाम हमारा प्रण — जनता अब हिसाब लेगी।” VIP प्रमुख मुकेश साहनी ने EBC और महादलित समाज को ललकारते हुए कहा, “अब 30 साल बिहार की सेवा का समय है। महागठबंधन सबका है, सबके लिए है।”
NDA का पलटवार और आने वाले दिन की सियासत
बीजेपी नेता नितिन नबीन ने कहा कि महागठबंधन का मेनिफेस्टो “अवास्तविक सपनों का पुलिंदा” है, जबकि चिराग पासवान ने तंज कसा, “झूठ बोलने में महारथ हासिल कर ली है इन लोगों ने, जनता सब जानती है।”
बीजेपी के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने तो यहां तक कह दिया, “तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनना भूल जाना चाहिए, चुनाव के बाद जेल में जगह मिलेगी।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव पूरी तरह “युवा बनाम पुरानी व्यवस्था” की लड़ाई बन चुका है। महिलाएं और युवा, जो 2020 में निर्णायक भूमिका में थे, इस बार महागठबंधन की ओर झुकते दिख रहे हैं।
राहुल-तेजस्वी की संयुक्त रैली और अंतिम मुकाबले का रोमांच
घोषणा पत्र जारी होने के बाद यह सवाल जरूर उठा कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति क्यों रही। गठबंधन के प्रवक्ताओं ने साफ किया कि “कल मुजफ्फरपुर में राहुल-तेजस्वी की संयुक्त रैली बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा शो साबित होगी।” NDA अपना मेनिफेस्टो 30 अक्टूबर को जारी करेगा, जिसे “विकसित बिहार संकल्प पत्र” नाम दिया गया है।
नतीजों से पहले जनता की अदालत में ‘प्रण पत्र’ की सुनवाई
बिहार में मतदान छह चरणों में 6 से 11 नवंबर तक होंगे, और परिणाम 14 नवंबर को आएंगे। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस बार चुनावी मुकाबला केवल सीटों का नहीं बल्कि “भविष्य के बिहार” की परिकल्पना का है।
तेजस्वी यादव का यह ‘प्रण पत्र’ क्या NDA के 20 साल पुराने गढ़ को हिला पाएगा? क्या यह वादों से भरा घोषणापत्र जनता के विश्वास में तब्दील हो सकेगा? इन सवालों के जवाब अब जनता की अदालत देगी — 14 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तब तय होगा कि बिहार का सूरज फिर तेजस्वी होगा या नीतीश की सत्ता कायम रहेगी।




