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अग्निवीर योजना अडानी की प्राइवेट आर्मी बनाने की साज़िश: कांग्रेस

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 कांग्रेस ने मंगलवार को दिल्ली में एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें पार्टी के एक्स-सर्विसमेन विभाग के चेयरमैन कर्नल (रिटायर्ड) रोहित चौधरी ने मोदी सरकार पर अग्निवीर योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। चौधरी ने दावा किया कि अग्निवीरों को पेंशन वाली सरकारी नौकरियां देने के वादे के बावजूद, अब उन्हें प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों, खासकर अडानी डिफेंस जैसे निजी क्षेत्रों में ‘प्राइवेट आर्मी’ के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने इसे ‘देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़’ बताते हुए कहा कि यह योजना न केवल युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रही है, बल्कि सैनिकों की पेंशन बचाकर पूंजीपतियों की जेब भरने का माध्यम बनी हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने ‘जय जवान कैंपेन’ के दूसरे चरण की घोषणा की, जो लोकसभा चुनाव से पहले शुरू हुए पहले चरण का विस्तार है। चौधरी ने स्पष्ट चेतावनी दी, “हम अग्निवीरों को प्राइवेट आर्मी बनाकर देश-विदेश के युद्धों में झोंकने नहीं देंगे। यह योजना खत्म होनी चाहिए, वरना हम सैनिकों के हित में सवाल उठाते रहेंगे।”

कर्नल चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में मोदी सरकार के ‘तीन काले कृषि कानूनों’ का जिक्र करते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा, “जब किसानों के लिए तीन काले कानून लाए गए थे, तब उससे पहले ही अडानी ने पूरे देश में हजारों एकड़ जमीन खरीद ली थी। यह कोई संयोग नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी। इसी तरह, अडानी डिफेंस 2015 में अस्तित्व में आया। 

उसके बाद 2020-22 तक सेना में कोई भर्ती ही नहीं हुई। अडानी ने धीरे-धीरे डिफेंस सेक्टर में अपना कारोबार फैला लिया।” चौधरी ने दावा किया कि अग्निवीर योजना का असली मकसद पेंशन पर होने वाले खर्च को कम करके उस पैसे को अडानी जैसे निजी खिलाड़ियों के पास पहुंचाना है। राहुल गांधी ने भी कई रैलियों में इस मुद्दे को उठाया है, जहां उन्होंने कहा था कि “अग्निवीर योजना सैनिकों की पेंशन बचाने के लिए लाई गई, ताकि वह पैसा अडानी डिफेंस को जा सके।” चौधरी ने आगे कहा, “अब इसी कड़ी में 4 साल के ट्रेंड अग्निवीरों को अडानी डिफेंस को सौंपा जा रहा है।

 क्या ये युवा प्राइवेट आर्मी बनकर विदेशी युद्धों में लड़ने के लिए तैयार किए जा रहे हैं? हमें मिलकर इसे रोकना होगा।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य फोकस अग्निवीरों के भविष्य पर था। चौधरी ने मोदी सरकार से कई तीखे सवाल पूछे: “जब अग्निवीरों को पेंशन वाली नौकरी और केंद्र-राज्य की सरकारी नौकरियों में शामिल करने का वादा किया गया था, तो आज उन्हें प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों में क्यों भेजा जा रहा है? आने वाले साल में लौटने वाले अग्निवीरों को पेंशन वाली नौकरी कब और कहां दी जाएगी?” उन्होंने गृह मंत्रालय के हालिया नोटिफिकेशन का हवाला दिया, जिसमें रिटायर होने वाले अग्निवीरों को देश की टॉप 10 प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों में रखने का प्रावधान किया गया है।

 चौधरी ने कहा, “मोदी सरकार ने सिर्फ 25% अग्निवीरों को रेगुलर किया है, बाकी 75% को वापस सड़कों पर छोड़ दिया जाएगा। वे बीजेपी दफ्तर या किसी कंपनी के बाहर दरबान की नौकरी करेंगे? यह हमारे जवानों के साथ धोखा है।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर जैसे सफल अभियानों में अच्छा काम करने वाले सैनिकों का उदाहरण देते हुए कहा, “अगर सरकार उन्हें प्रोत्साहन नहीं दे सकती, तो कम से कम धोखा तो न दें। राहुल गांधी जी लगातार कहते आ रहे हैं कि कम ट्रेंड सैनिक देकर मोदी सरकार पूंजीपतियों की तिजोरी भर रही है।”

यह आरोप हाल ही में गृह मंत्रालय के एक नोटिफिकेशन से जुड़े हैं, जिसमें पूर्व अग्निवीरों को निजी सिक्योरिटी फर्मों में प्राथमिकता देने का जिक्र है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास है, लेकिन विपक्ष इसे ‘प्राइवेट आर्मी’ बनाने की साजिश बता रहा है। कर्नल चौधरी ने कहा, “क्या अग्निवीर अब अडानी डिफेंस के अंदर जाएंगे और वहां प्राइवेट आर्मी की तरह काम करेंगे? सरकार ने भर्ती रोककर अडानी को फायदा पहुंचाया, अब ट्रेंड सैनिकों को सौंप रही है।” उन्होंने अडानी डिफेंस के 2015 से विस्तार का जिक्र किया, जब सेना की भर्तियां ठप्प पड़ीं। अडानी ग्रुप ने हाल ही में डिफेंस सेक्टर में $2-2.5 बिलियन के निवेश की घोषणा की है, जिसमें ड्रोन और मिसाइल तकनीक शामिल है, जो विपक्ष के आरोपों को बल दे रही है।

कांग्रेस ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए ‘जय जवान कैंपेन पार्ट 2’ की शुरुआत की, जो लोकसभा चुनाव से पहले चलाए गए पहले चरण का विस्तार है। चौधरी ने कहा, “हम सभी वचनबद्ध हैं कि अग्निवीर योजना देश की सुरक्षा और युवाओं के लिए घातक है। यह खत्म होनी चाहिए।” पार्टी ने पूर्व सैनिकों और युवाओं से अपील की कि वे इस अभियान में शामिल हों और सरकार से सफाई मांगें। विपक्षी दलों ने भी समर्थन जताया है, जबकि बीजेपी ने इन आरोपों को ‘झूठा प्रचार’ बताते हुए कहा कि अग्निवीर योजना सेना को युवा और तकनीकी रूप से मजबूत बना रही है। रक्षा मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट किया है कि योजना पेंशन खर्च कम करने के साथ-साथ सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए है, लेकिन चौधरी ने इसे ‘अर्धसत्य’ करार दिया।

यह विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे को फिर से गरमा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अग्निवीरों के 75% युवाओं को बिना पेंशन के निजी क्षेत्र में धकेला गया, तो सेना की मनोबल पर असर पड़ेगा। कांग्रेस ने व्हाइट पेपर की मांग की है, जिसमें योजना के सभी पहलुओं का खुलासा हो। फिलहाल, ‘जय जवान’ अभियान के तहत देशभर में रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होने हैं, जो 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। कर्नल चौधरी ने समाप्ति पर कहा, “हम सैनिकों के सम्मान की रक्षा करेंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।” यह प्रेस कॉन्फ्रेंस न केवल अग्निवीरों के भविष्य पर सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि मोदी सरकार की रक्षा नीतियों पर भी गहरा सवालिया निशान लगा रही है।

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