महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘वोट चोरी’ का मुद्दा गरमाता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता और वर्ली विधायक आदित्य ठाकरे ने सोमवार को अपनी निर्वाचन क्षेत्र वर्ली में वोटर लिस्ट की गहन जांच के बाद चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि वोटर लिस्ट में 19,333 अनियमितताएं पाई गई हैं, जिनमें डुप्लिकेट नाम, मृत वोटरों के नाम, गलत फोटो और एक ही पते पर दर्ज सैकड़ों वोटर शामिल हैं। ठाकरे ने इसे ‘वोट चोरी’ का स्पष्ट प्रमाण बताते हुए चुनाव आयोग पर निशाना साधा है, आरोप लगाया है कि आयोग ने वोटर लिस्ट को शुद्ध करने की अपनी जिम्मेदारी न निभाकर बड़े पैमाने पर धांधली को बढ़ावा दिया है। यह खुलासा बीएमसी चुनावों से ठीक पहले आया है, जिससे विपक्षी दलों में हड़कंप मच गया है। ठाकरे ने कहा, “हम लगातार कहते आ रहे हैं कि भारत में चुनाव आयोग द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं कराए जा रहे। आयोग ने वोटर लिस्ट को शुद्ध न करके बड़े पैमाने पर धांधली की इजाजत दी है।”
आदित्य ठाकरे ने रविवार को ही मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित ‘निर्धार मेळावा’ रैली में इस मुद्दे को विस्तार से उठाया। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 (मई) और विधानसभा चुनाव (नवंबर 2024) के बीच वोटर लिस्ट के आंकड़ों की तुलना पेश की।
वर्ली निर्वाचन क्षेत्र में लोकसभा चुनाव के समय 2,52,970 वोटर थे, जो विधानसभा चुनाव में बढ़कर 2,63,352 हो गए। इसमें 16,043 नए वोटर जोड़े गए, जबकि 5,661 नाम हटाए गए। लेकिन ठाकरे के अनुसार, जांच में कुल 19,333 वोटरों में अनियमितताएं मिलीं, जिनमें डुप्लिकेट एंट्री, मृत लोगों के नाम, बिना ईपीआईसी नंबर वाले वोटर, गलत फोटो और एक ही पते पर दर्ज कई वोटर शामिल हैं। उन्होंने एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की, “वर्ली में 113 वोटर 100 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।
अगर लंबी उम्र जीना चाहते हैं, तो वर्ली आइए!” ठाकरे ने पावर-पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए ‘बोगस सरकार के बोगस वोटर’ शीर्षक से डेटा दिखाया, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान से प्रेरित लग रहा था। उन्होंने कहा, “अगर मेरी सीट पर यह धांधली हुई, तो पूरे राज्य में वर्तमान सरकार ने कितनी वोट चोरी की होगी, इसका अंदाजा लगाइए।”
इस खुलासे के बाद ठाकरे ने अपनी पार्टी के पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर लिस्ट की विस्तृत जांच करें, अनियमितताओं की पहचान करें और आपत्ति दर्ज कराएं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की, “मेरा दायित्व मेरी लिस्ट है।
हर कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी लिस्ट को अपनाए। डुप्लिकेट नाम, मृत वोटर, गलत फोटो और पते की जांच करें।” ठाकरे ने चेतावनी दी कि अगर ये अनियमितताएं ठीक नहीं की गईं, तो बीएमसी चुनावों के परिणामों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। विपक्षी दल महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के अन्य नेता भी इस मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा, “अगर वोटर लिस्ट की अनियमितताएं सुधार नहीं की गईं, तो विपक्ष मिलकर तय करेगा कि लोकल बॉडी चुनाव कराने ही हैं या नहीं।” उद्धव ने चुनाव आयोग पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के लिए मुकदमे चलाने की मांग भी की।
यह विवाद महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। पूरे देश में चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट शुद्धीकरण में नाकामी के आरोप लग रहे हैं। राहुल गांधी ने अगस्त 2025 में ‘वोट चोरी’ अभियान शुरू किया था, जिसमें कर्नाटक के महादेवपुरा में 40,000 से अधिक अमान्य पते और डुप्लिकेट वोटरों का दावा किया गया।
बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान लाखों वोटरों के नाम काटे जाने पर विपक्ष ने मुस्लिम वोटरों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने दावा किया कि 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में प्रत्येक सीट पर एमवीए समर्थकों के 10,000 वोट काटे गए।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को ‘बेबुनियाद’ बताते हुए सफाई दी है कि सभी चुनाव कानून के अनुसार हुए हैं और पार्टियों से लिखित शिकायत मांग ली है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि आयोग बीजेपी के हित में काम कर रहा है, जिससे लोकतंत्र खतरे में है। ठाकरे ने कहा, “चुनाव आयोग, जो बीजेपी के फायदे के लिए भारत में स्वतंत्र चुनाव नहीं करा रहा, उसे नियमों का पालन करने पर मजबूर करना होगा ताकि लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया जा सके।”
इस बीच, विपक्ष ने 1 नवंबर को मुंबई में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ मार्च निकालने का ऐलान किया है। ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से कहा, “बीएमसी चुनाव सिर्फ प्रचार से नहीं जीते जाते, बल्कि वोटर लिस्ट हाथ में लेकर जीते जाते हैं।” बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष हार की आशंका से बौखला गया है।
महाराष्ट्र में बीएमसी चुनावों की तारीखों का ऐलान होने से ठीक पहले यह विवाद तेज हो गया है, जो राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये आरोप साबित हुए, तो यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा करेगा। फिलहाल, विपक्ष की यह लड़ाई ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के अधिकार को बचाने की हो गई है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और गरमाने की संभावना है।







