नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2025
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि “SIR योजना” (Systematic Information Reporting) के नाम पर बिहार को लोकतंत्र की हत्या की प्रयोगशाला बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब एक निष्पक्ष संस्था नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक औजार बन गया है जो सत्ता के इशारे पर काम कर रहा है। खेड़ा ने कहा कि जिस आयोग का काम देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है, वह आज सत्ता के इशारों पर विपक्ष को कमजोर करने और जनता के जनादेश को प्रभावित करने का उपकरण बन गया है। उनका कहना था कि “SIR” जैसी योजना का उद्देश्य यदि वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करना होता, तो इसमें मतदाता सूची को साफ करने के नाम पर करोड़ों वोट काटे नहीं जाते, बल्कि नए मतदाताओं को जोड़ने का अभियान चलाया जाता। लेकिन वास्तविकता यह है कि बिहार को इस प्रयोग का केंद्र बनाकर वोटर सूची में हेराफेरी के ज़रिए लोकतंत्र को अपंग बनाने की कोशिश की जा रही है।
पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि आखिर यह “SIR” योजना किस दिशा में ले जा रही है और क्या इसके नाम पर जनता के अधिकारों का गला घोंटा जा रहा है? उन्होंने कहा, “SIR के ज़रिए क्या बिहार को लोकतंत्र की हत्या करने की प्रयोगशाला बनाया गया है? क्या यह सिर्फ एक तकनीकी योजना है या फिर सत्ता का वह हथियार जो मतदाता सूची में हेराफेरी कर विपक्षी वोट काटने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है?” उनके अनुसार, यह न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आत्मा पर हमला है बल्कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी गहरा प्रश्नचिह्न है। उन्होंने आगे कहा कि जब आयोग खुद पर सवालों के जवाब देने से बचता है, जब पारदर्शिता की जगह गोपनीयता और जनता से दूरी बनाई जाती है, तब यह साबित होता है कि लोकतंत्र पर सबसे बड़ा खतरा उन संस्थाओं से है जिन्हें लोकतंत्र की रक्षा करनी थी।
खेड़ा ने 12 राज्यों में SIR योजना की घोषणा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने यह नहीं बताया कि क्या इसके दिशा-निर्देश 2003 के पुराने SIR मॉडल से अलग होंगे या नहीं। अगर यह नया संस्करण है, तो इसमें क्या बदलाव किए गए हैं, कौन-सी तकनीकें इस्तेमाल होंगी, डेटा की सुरक्षा और सत्यापन की क्या प्रक्रिया होगी — इन सब पर आयोग चुप है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही का यह अभाव चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। “जब आयोग 12 राज्यों में SIR लागू करने जा रहा है, तो उसे जनता को बताना चाहिए कि यह नया ढांचा पुराने से किस तरह भिन्न है। क्या इसमें नागरिकों को उनके वोट काटे जाने की सूचना दी जाएगी? क्या मतदाता सूची में संशोधन के लिए कोई सार्वजनिक शिकायत तंत्र है? क्या किसी स्वतंत्र निगरानी एजेंसी को इसमें शामिल किया गया है?” — खेड़ा ने कहा।
उन्होंने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में चुनाव आयोग ने 65 लाख वोट काट दिए, लेकिन न तो डोर-टू-डोर सत्यापन किया गया और न ही लोगों को सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के साथ धोखा है, क्योंकि वोट काटने का फैसला किसी डेटा विश्लेषण पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव में लिया गया है। “क्या किसी अधिकारी ने जाकर जांच की कि जिनके वोट काटे गए वे जीवित हैं या नहीं? क्या किसी घर पर जाकर जानकारी ली गई कि वे अब भी उस पते पर रहते हैं या नहीं? नहीं। क्योंकि असली मकसद मतदाता जोड़ना नहीं, विपक्षी मतदाताओं को मिटाना था,” — पवन खेड़ा ने कहा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की खुली हत्या बताया और कहा कि अगर यही रुझान जारी रहा तो भारत का चुनावी तंत्र केवल नाम का रह जाएगा, उसकी आत्मा मर जाएगी।
खेड़ा ने कहा कि SIR का यह नया राउंड वास्तव में जनमत के अपहरण का औजार है। अगर इस योजना का मकसद वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करना होता, तो चुनाव आयोग युवाओं और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए देशव्यापी अभियान चलाता, कॉलेजों में रजिस्ट्रेशन कैंप लगवाता, और ग्रामीण इलाकों में घर-घर सत्यापन अभियान शुरू करता। लेकिन चुनाव आयोग ने इसके बजाय चुप्पी साधी हुई है, जो दर्शाता है कि सत्ता की सुविधा के अनुसार मतदाता सूची को पुनर्गठित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “SIR योजना का उद्देश्य अब साफ हो गया है — मतदाता सूची को डेटा मैनिपुलेशन का हथियार बनाकर विपक्षी वोटों को खत्म करना और सत्ता को लाभ पहुँचाना।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आज देश का हर नागरिक यह देख रहा है कि कैसे संवैधानिक संस्थाएं अपनी साख खो रही हैं। चुनाव आयोग, जो कभी निष्पक्षता का प्रतीक हुआ करता था, अब अपने फैसलों से यह साबित कर रहा है कि वह सत्ता के दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है। अगर उसी वोट को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी, तो यह लोकतंत्र नहीं रहेगा, बल्कि सत्ता का तमाशा बन जाएगा।” पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में जब चुनाव आयोग निष्पक्षता खो देता है, तो जनता का भरोसा खत्म होता है — और यही लोकतंत्र के पतन की शुरुआत होती है।
खेड़ा ने अंत में कहा कि कांग्रेस SIR योजना की पूरी जांच की मांग करेगी। पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि इस योजना से जुड़े सभी दिशा-निर्देश और आंतरिक प्रक्रियाएं सार्वजनिक की जाएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस साजिश का पर्दाफाश करेगी और जनता के बीच जाकर बताएगी कि कैसे “SIR” जैसी तकनीकी योजनाओं के ज़रिए लोकतंत्र को कमजोर करने की रणनीति रची जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर SIR योजना का इस्तेमाल लोकतंत्र को विकृत करने के लिए किया गया, तो कांग्रेस सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भारत के लोग अब चुप नहीं रहेंगे। वे जान चुके हैं कि लोकतंत्र के नाम पर सत्ता किस तरह डेटा की तानाशाही थोपना चाहती है। “हम हर स्तर पर लड़ेंगे ताकि किसी भी राज्य को लोकतंत्र की प्रयोगशाला बनाकर नागरिक अधिकारों को कुचला न जा सके,” — पवन खेड़ा ने कहा। उन्होंने दो टूक कहा कि SIR का इस्तेमाल अगर वोट काटने के लिए किया गया, तो कांग्रेस इसे देशव्यापी जनांदोलन का मुद्दा बनाएगी।




