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वोट बैंक की खातिर गरीब मुसलमानों, बेवाओं और यतीमों का हक खा रहे तेजस्वी : मुस्लिम राष्ट्रीय मंच

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नई दिल्ली 28 अक्टूबर 2025

 राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव द्वारा वक्फ बिल को “कूड़ेदान में फेंकने” का विवादास्पद ऐलान बिहार की राजनीति में आग भड़काने वाला साबित हो रहा है। इस बयान पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंच की राष्ट्रीय संयोजक और महिला विंग की प्रमुख डॉ. शालिनी अली ने कहा, “तेजस्वी यादव का यह बयान बेवाओं, यतीमों और मिस्कीनों के साथ खुली धोखाधड़ी है। वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंकना गरीब मुसलमानों के अधिकारों पर सीधा हमला है।” उन्होंने आगे कहा कि यह कानून वक्फ संपत्तियों में दशकों से फैले भ्रष्टाचार और लूट-खसोट पर लगाम लगाने के लिए बना है, जिससे गरीब मुसलमानों, यतीम बच्चों, विधवाओं और पसमांदा समुदाय के उत्थान के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

सीमांचल रैली में सेक्युलर पाखंड की पोल 

26 अक्टूबर 2025 को सीमांचल क्षेत्र की रैली में तेजस्वी यादव द्वारा वक्फ संशोधन कानून को ‘कूड़ेदान में फेंकने’ की धमकी देने के बाद से राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इसे “मुस्लिम समाज के हितों पर सीधा वार” बताया है। मंच का कहना है कि तेजस्वी यादव का यह बयान बताता है कि वे वक्फ संपत्तियों को गरीब मुसलमानों की तरक्की के बजाय राजनीतिक वोट बैंक की मशीनरी के रूप में देखना चाहते हैं। डॉ अली ने कहा कि यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय को सीधे तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, विधवा कल्याण और रोज़गार सृजन के लिए उपयोग में लाने का प्रावधान करता है। ऐसे में तेजस्वी यादव का विरोध बताता है कि वे नहीं चाहते कि मुस्लिम समाज आत्मनिर्भर और सशक्त बने।

डॉ. शालिनी अली का तीखा हमला — “वोट बैंक की भूख में इंसानियत को कुर्बान किया जा रहा है”

मंच की महिला प्रमुख ने कहा कि वक्फ संशोधन कानून 2024 कोई राजनीतिक योजना नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति है। उन्होंने कहा, “यह कानून वक्फ संपत्तियों को डिजिटलाइज करने, तीसरे पक्ष के ऑडिट और सार्वजनिक पारदर्शिता से जोड़ने का काम करता है। इसका मकसद है कि वक्फ की आमदनी यतीमों, विधवाओं, बेघरों और गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च हो। लेकिन तेजस्वी यादव और उनके जैसे नेता नहीं चाहते कि मुसलमान तरक्की करें, क्योंकि तब उनकी वोट बैंक की राजनीति खत्म हो जाएगी।”

डॉ. अली ने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार के उन गरीब मुसलमानों के साथ विश्वासघात है, जिन्होंने हमेशा आरजेडी को अपना प्रतिनिधि समझा। उन्होंने चुनौती दी कि तेजस्वी यादव एक बार जाकर देख लें कि वक्फ संपत्तियों की गड़बड़ियों से कितनी मस्जिदें, मदरसे और अनाथालय तबाह हो चुके हैं। “अगर वे सच में मुसलमानों के हितैषी होते, तो वक्फ कानून को मज़बूत करने की मांग करते, न कि उसे कूड़ेदान में फेंकने की बात करते,” — उन्होंने कहा।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का बयान — ‘वक्फ मुसलमानों की अमानत है, कोई वोट बैंक नहीं’

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अपने बयान में कहा कि तेजस्वी यादव का रवैया यह साबित करता है कि आरजेडी जैसी तथाकथित सेक्युलर पार्टियां केवल मुस्लिम वोटों को अपने कब्ज़े में रखना चाहती हैं, लेकिन उनके उत्थान में कोई दिलचस्पी नहीं रखतीं। मंच ने कहा कि वक्फ संपत्तियां किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं हैं। वे मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक अमानत हैं, जिन्हें भ्रष्टाचार और दलगत राजनीति से मुक्त करने की ज़रूरत है।

डॉ अली के अनुसार, वक्फ संशोधन कानून 2024 इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है — यह न केवल संपत्तियों के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाता है, बल्कि तीसरे पक्ष की निगरानी और पारदर्शी ट्रस्ट प्रबंधन का मार्ग खोलता है। “यह अधिनियम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की भावना को वास्तविक रूप देता है,” — मंच ने कहा।

वोट बैंक बनाम विकास बैंक — मुस्लिम समाज अब जाग चुका है

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा कि अब समय आ गया है जब मुसलमान यह पहचानें कि कौन उनके साथ खड़ा है और कौन उनके नाम पर राजनीति कर रहा है। मंच ने चेतावनी दी कि कोई भी दल अगर वक्फ संपत्तियों को निजी लाभ या राजनीतिक सौदेबाज़ी के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा, तो मुस्लिम समाज सड़कों पर उतरकर उसका विरोध करेगा। “मुसलमान अब वोट बैंक नहीं, विकास बैंक बनना चाहता है,” — मंच ने कहा। “हम वक्फ संपत्तियों की रक्षा करेंगे, उनकी आय को बेवाओं, यतीमों और पसमांदा मुसलमानों के कल्याण में लगाएंगे। तेजस्वी यादव जैसे नेता इस हक को छीनने की कोशिश करेंगे तो उन्हें जनता जवाब देगी।”

तेजस्वी की ओछी राजनीति उजागर

शालिनी अली ने साफ कहा कि तेजस्वी यादव का यह बयान उनकी मानसिकता और उनकी राजनीति दोनों का पर्दाफाश करता है। वक्फ कानून को “कूड़ेदान में फेंकने” की बात करके उन्होंने न केवल मुस्लिम समाज का अपमान किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि वे गरीब मुसलमानों के विकास से डरते हैं। मंच ने कहा कि अब मुस्लिम समाज इस राजनीतिक पाखंड को स्वीकार नहीं करेगा। देशभर में मंच जन – जागरूकता अभियान चलाएगा, जिसमें बताया जाएगा कि वक्फ संपत्तियों का असली मालिक गरीब मुसलमान हैं — न कि कोई राजनीतिक पार्टी या नेता। डॉ. अली ने कहा, “तेजस्वी यादव को यह समझना होगा कि वक्फ मुसलमानों की अमानत है, और इसे कोई भी नेता अपने राजनीतिक हितों की बलि नहीं चढ़ा सकता। यह कानून हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करेगा — और यही सच्चा इंसाफ है।”

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