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जेडीयू में बगावत पर वार: गोपाल मंडल आउट, 48 घंटे में 16 नेता बाहर

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पटना 27 अक्टूबर 2025

पटना। बिहार की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में बगावत की आग अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी ने संगठन के भीतर उठ रहे असंतोष और अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए गोपाल मंडल सहित 16 नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पिछले दो दिनों में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है, जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह की मंजूरी के बाद अंजाम दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, गोपाल मंडल, जो अपने बयानों और विवादास्पद गतिविधियों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और अनुशासन भंग करने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार, मंडल ने हाल ही में कई मौकों पर जेडीयू नेतृत्व की नीतियों की आलोचना की थी और गठबंधन सहयोगी आरजेडी के नेताओं के साथ बढ़ती नजदीकियों पर भी आपत्ति जताई थी। इससे पार्टी नेतृत्व नाराज था और अंततः उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “जेडीयू में अनुशासन से बड़ा कोई नहीं है। पार्टी किसी भी कीमत पर बगावत या गुटबाजी को सहन नहीं करेगी। जिन लोगों ने पार्टी की मर्यादा का उल्लंघन किया है, उन्हें निष्कासित किया गया है, और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की एकजुटता बनाए रखने के लिए जरूरी था।

जेडीयू के अंदर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार की राजनीति में महागठबंधन की एकजुटता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की केंद्र सरकार से बढ़ती नजदीकी और विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठकों से उनकी दूरी ने कई पुराने जेडीयू नेताओं में असंतोष पैदा किया है। कई वरिष्ठ नेता खुलकर यह कहते नजर आए कि पार्टी “अपनी विचारधारा से भटक रही है” और “लालू-तेजस्वी की छाया” में सिमट गई है। अब जबकि नीतीश कुमार 2025 के चुनाव की तैयारी में जुटे हैं, यह साफ संकेत है कि वे संगठन में किसी भी तरह की असहमति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बिहार की राजनीतिक गलियारों में यह कार्रवाई “संदेश देने वाला कदम” मानी जा रही है। जेडीयू नेतृत्व यह दिखाना चाहता है कि पार्टी में “एक नेता, एक दिशा” का नियम चलेगा और जो इस रेखा को पार करेगा, उसे बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस अनुशासनात्मक कार्रवाई के ज़रिए नीतीश कुमार ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में वे पार्टी को एक “नए अनुशासित स्वरूप” में पेश करना चाहते हैं — चाहे इसके लिए पुराने और प्रभावशाली चेहरों को ही क्यों न हटाना पड़े।

दूसरी ओर, गोपाल मंडल ने अपने निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “मैंने कोई गलती नहीं की है। मैं केवल सच बोलता हूं, और यही मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया गया।” उन्होंने नीतीश कुमार पर “दोहरे रवैये” का आरोप लगाया और कहा कि जेडीयू अब उस पार्टी की तरह नहीं रही जिसे कभी जनता का समर्थन मिलता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि “जल्द ही कई और नेता पार्टी छोड़ेंगे और नई राजनीतिक दिशा तय करेंगे।”

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जेडीयू के भीतर असंतोष केवल कुछ नामों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई जिला और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ता भी नेतृत्व से नाराज़ हैं। उनके मुताबिक, सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी बढ़ती जा रही है, और पार्टी की विचारधारा अब “लाभ के समीकरणों” में सिमट गई है।

जेडीयू में हुई यह बड़ी कार्रवाई बिहार की राजनीति में एक नए मोड़ की शुरुआत है। एक तरफ नीतीश कुमार अपनी पार्टी को अनुशासन और नियंत्रण में रखना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ असंतुष्टों का एक तबका धीरे-धीरे नया समीकरण बनाने की तैयारी में दिख रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह “अनुशासन बनाम असंतोष” की लड़ाई जेडीयू को मज़बूत करेगी या भीतर से कमजोर।

 

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