राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 जुलाई 2026
भारत के मानसून को लेकर एक नई वैज्ञानिक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के शोधकर्ताओं ने पाया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान होने वाली करीब 25% बारिश जमीन तक पहुंचने से पहले ही हवा में वाष्प बनकर उड़ जाती है।
शोध के अनुसार जून से सितंबर के बीच उत्तर-पश्चिमी पश्चिमी घाट क्षेत्र में वर्षा का औसतन 25% हिस्सा मध्य हवा में ही वाष्पित हो जाता है। हालांकि यह मात्रा हर दिन अलग-अलग होती है और 4% से 61% तक हो सकती है। भारत में इस तरह का प्रत्यक्ष प्रयोग पहली बार किया गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई जानकारी से मौसम पूर्वानुमान और जलवायु मॉडल पहले से अधिक सटीक बनाए जा सकेंगे। इससे मानसून की प्रकृति, वर्षा के वितरण और जल चक्र को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश का हवा में वाष्पित होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसकी सही मात्रा का पता चलने से भविष्य में मानसून की भविष्यवाणी, जल संसाधन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन संबंधी शोध को नई दिशा मिल सकती है।




