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सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में निजी भागीदारी की राह आसान, शीतकालीन सत्र में 10 नए विधेयक प्रस्तावित

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अवधेश कुमार  | नई दिल्ली, 23 नवंबर 2025

भारत सरकार ने संसद के आने वाले शीतकालीन सत्र के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधेयक सूची तैयार की है, जिसमें कुल दस नए बिल पेश किए जाने हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है परमाणु ऊर्जा (संशोधन) विधेयक 2025 यानी The Atomic Energy (Amendment) Bill, 2025। यह बिल पिछले 63 साल में परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 में होने वाला सबसे बड़ा संशोधन है। इस बिल के जरिए पहली बार देश के नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को पूरी तरह सरकारी एकाधिकार से बाहर निकालकर भारतीय निजी कंपनियों के लिए सीमित लेकिन ठोस प्रवेश का रास्ता खोला जा रहा है। अब तक परमाणु ऊर्जा का पूरा क्षेत्र – चाहे रिएक्टर बनाना हो, संचालन हो या ईंधन चक्र हो – सिर्फ सरकार के हाथ में था, मुख्य रूप से न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के पास। नया बिल निजी भारतीय कंपनियों को छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) बनाने, चलाने और NPCIL के साथ जॉइंट वेंचर या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल में हिस्सेदारी देने की इजाजत देगा। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि परमाणु ईंधन का संवर्धन (एनरिचमेंट), री-प्रोसेसिंग और रणनीतिक नियंत्रण पूरी तरह सरकार के पास ही रहेगा, साथ ही विदेशी कंपनियों को अभी भी इस क्षेत्र में सीधा प्रवेश नहीं मिलेगा।

इसके अलावा दूसरा सबसे अहम बिल है उच्च शिक्षा आयोग विधेयक 2025 यानी Higher Education Commission of India Bill, 2025। इस बिल के जरिए मौजूदा यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) को पूरी तरह खत्म करके एक नया एकल नियामक संस्था बनाई जाएगी। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ग्रेडेड स्वायत्तता दी जाएगी, यानी जो संस्थान अच्छा परफॉर्म करेंगे उन्हें कोर्स, फीस और प्रवेश में ज्यादा आजादी मिलेगी। मान्यता देने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाएगा, साथ ही निजी विश्वविद्यालयों के लिए भी नए सख्त लेकिन आसान नियम बनाए जाएंगे।

तीसरा बड़ा बिल है राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक 2025। इसके तहत हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन अधिग्रहण को बहुत तेज करने की कोशिश की गई है। अभी कई प्रोजेक्ट सालों-साल कोर्ट-कचहरी और मुआवजे के विवाद में अटके रहते हैं। नए प्रावधानों से तय समय में मुआवजा, एकल खिड़की मंजूरी और विवाद निपटारे की नई व्यवस्था होगी।

इसी तरह कंपनी कानून (संशोधन) विधेयक 2025 और सीमित दायित्व भागीदारी (संशोधन) विधेयक 2025 लाकर कारोबार करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने का प्लान है। छोटी-बड़ी कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन, ऑडिट, कंप्लायंस और दिवालिया प्रक्रिया में कई राहतें दी जाएंगी। बाकी के पांच बिल तकनीकी प्रकृति के हैं जिनमें पुराने कानूनों में छोटे-मोटे सुधार हैं।

संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा, कुल 15 बैठकें होंगी। सरकार ने इन सभी विधेयकों को “राष्ट्रीय हित और विकास की नई दिशा” बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी से 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा, क्योंकि अकेला NPCIL इतने बड़े निवेश और इतनी तेजी से नए रिएक्टर नहीं लगा सकता। लेकिन विपक्ष और कई पर्यावरण संगठन पहले से ही सवाल उठा रहे हैं कि क्या परमाणु सुरक्षा, रेडिएशन मानक और आपदा प्रबंधन के मामले में निजी कंपनियां उतनी सख्ती रख पाएंगी जितनी सरकारी संस्थाएं रखती हैं।

कुल मिलाकर आने वाला शीतकालीन सत्र पिछले कई सालों का सबसे महत्वपूर्ण सत्र होने जा रहा है, जिसमें अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर – चारों मोर्चों पर एक साथ बड़े सुधारों की बुनियाद रखी जाएगी। संसद में इन बिलों पर तीखी बहस तय है, लेकिन सरकार के पास बहुमत है और वह इन्हें पास कराने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही है।

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