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बिहार चुनाव: NDA में सीट शेयरिंग का ऐलान, बीजेपी-जेडीयू 101-101 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट शेयरिंग का फ़ॉर्मूला आखिरकार तय हो गया है। कई दौर की मैराथन बैठकों और अंदरूनी चर्चाओं के बाद बीजेपी और जेडीयू के बीच 101-101 सीटों पर सहमति बनी है, जबकि बाकी सीटें एनडीए के अन्य सहयोगी दलों — हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), राष्ट्र लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनतांत्रिक पार्टी (RLJP) को दी जाएंगी।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब विपक्षी महागठबंधन में लगातार मतभेद की खबरें आ रही हैं और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बिहार में अपनी राजनीतिक पकड़ को दोबारा साबित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और जेडीयू दोनों 101-101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे, जबकि RLJP को 20 सीटें, हम को 12 सीटें और कुशवाहा की पार्टी को 9 सीटें देने पर सहमति बनी है। कुल मिलाकर, एनडीए 243 विधानसभा सीटों पर संयुक्त रूप से चुनाव लड़ेगा।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “एनडीए परिवार एकजुट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुभव के साथ बिहार में विकास, स्थिरता और सुशासन की यात्रा जारी रहेगी।” जेडीयू की ओर से विजय चौधरी ने कहा, “सीट बंटवारे पर कोई विवाद नहीं हुआ। हमारा लक्ष्य सिर्फ़ एक है — बिहार को पिछड़ेपन से निकालकर आत्मनिर्भर बनाना।”

हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह सीट बंटवारा संतुलन और सतर्कता दोनों का मिश्रण है। पिछली बार बीजेपी ने जेडीयू से ज़्यादा सीटें लड़ी थीं, लेकिन इस बार दोनों दलों के बीच ‘बराबरी का फॉर्मूला’ अपनाया गया है ताकि सहयोगी संबंधों में किसी प्रकार की दरार न आए।

नीतीश कुमार के लिए यह चुनाव राजनीतिक अस्तित्व की परीक्षा माने जा रहे हैं। कई बार पाला बदलने के बाद अब वे एनडीए के साथ फिर से मज़बूत भूमिका में हैं, लेकिन राज्य में रोज़गार, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे अब भी प्रमुख चुनौती बने हुए हैं।

दूसरी ओर, बीजेपी ने इस बार बिहार में “मोदी-नीतीश डबल इंजन” की थीम पर चुनाव अभियान चलाने की योजना बनाई है। पार्टी का फोकस युवाओं, महिला वोटरों और पहली बार वोट डालने वाली नई पीढ़ी पर रहेगा।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस गठबंधन का स्वरूप फिलहाल स्थिर दिख रहा है, लेकिन सीट बंटवारे के बाद उम्मीदवार चयन और स्थानीय समीकरण तय करेंगे कि यह एकजुटता कितनी टिकाऊ है।

बिहार में जल्द ही चुनावी प्रचार का बिगुल बजने वाला है, और एनडीए के इस ऐलान के साथ ही विपक्षी महागठबंधन पर दबाव बढ़ गया है कि वे भी अपना सीट बंटवारा और रणनीति जल्द घोषित करें।

 

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