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RTI के 20 साल: कांग्रेस बोली — मोदी सरकार ने पारदर्शिता की रीढ़ तोड़ दी

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2025

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को कहा कि 20 साल पहले कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने देश में पारदर्शिता और जवाबदेही के नए युग की शुरुआत की थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के नेतृत्व में ‘सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) 2005’ लागू हुआ था।

खड़गे ने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से इस ऐतिहासिक कानून को कमजोर किया है, जिससे लोकतंत्र की जड़ें हिल गईं और नागरिकों का सूचना पाने का अधिकार लगभग समाप्त कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, “2019 में मोदी सरकार ने सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन पर नियंत्रण कर लिया, जिससे स्वतंत्र निगरानी संस्थाएं अब सरकार के अधीन सेवक बन गई हैं। 2023 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट लाकर ‘जनहित’ की धारा को ही कमजोर कर दिया गया। अब निजता के नाम पर भ्रष्टाचार को छिपाने और जवाबदेही से बचने का रास्ता बना लिया गया है।”

खड़गे ने यह भी बताया कि केंद्रीय सूचना आयोग लंबे समय से बिना मुख्य आयुक्त के काम कर रहा है — यह पिछले 11 सालों में सातवीं बार हुआ है जब यह पद रिक्त पड़ा है। 15 महीने से आठ पद खाली हैं, जिससे अपीलों की सुनवाई ठप है और हजारों नागरिक न्याय से वंचित हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘No Data Available’ संस्कृति फैलाने का भी आरोप लगाया, “सरकार अब कोविड के दौरान हुई मौतों, NSSO 2017-18, ASUSE 2016–2020 और PM CARES जैसी जानकारियों पर भी चुप्पी साधे हुए है। आंकड़े मिटाकर जवाबदेही से भागना अब इस शासन का प्रतीक बन गया है।”

खड़गे ने बताया कि 2014 के बाद से 100 से अधिक RTI कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है, जिससे सच बोलने वालों में डर का माहौल बना है।

कांग्रेस का ऐतिहासिक संदर्भ: RTI सहित छह बड़े कानूनों की याद

कांग्रेस सांसद और पार्टी के संचार महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आज ही के दिन, 12 अक्टूबर 2005 को, सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था।

उन्होंने कहा, “यह कानून भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक क्रांति थी। यूपीए सरकार ने शासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए ऐसे छह बड़े अधिनियम लागू किए थे।”

उन्होंने सूची गिनाई —

1. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

2. ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005

3. वन अधिकार अधिनियम, 2006

4. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009

5. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013

6. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013

जयराम रमेश ने कहा कि इन सभी कानूनों का उद्देश्य था “सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और आम आदमी को अधिकार देना।”

उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “2019 में जब सूचना का अधिकार अधिनियम में संशोधन लाया गया, तो उसे स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों के बिना ही पारित किया गया। मनमोहन सिंह सरकार ने हर सुझाव को माना था, लेकिन मोदी सरकार ने सभी सिफारिशें ठुकरा दीं। वहीं से इस अधिनियम को पहला बड़ा झटका लगा।”

कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि सरकार तुरंत केंद्रीय सूचना आयोग में सभी रिक्त पदों को भरे, अधिनियम की मूल भावना को पुनर्जीवित करे और सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे — ताकि “लोकतंत्र की रीढ़ — जवाबदेही और पारदर्शिता — फिर से मजबूत हो सके।”

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