एबीसी डेस्क 18 दिसंबर 2025
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान के दौरान एक और जवान ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) में तैनात कांस्टेबल अमजद अली खान उधमपुर जिले के मजाल्टा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए। वे मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सबसे दर्दनाक दृश्य तब सामने आया, जब शहीद की एक साल की बेटी अपने पिता के पार्थिव शरीर के पास रोती नजर आई। वह बार-बार “पापा… पापा…” पुकार रही थी। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। यही वह सच्चाई है, जो आतंकवाद अपने पीछे छोड़ जाता है।
खुफिया सूचना पर चला था ऑपरेशन
सुरक्षा बलों को उधमपुर के सोअन गांव में आतंकियों के छिपे होने की पुख्ता सूचना मिली थी। इसके बाद इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया। इसी दौरान तीन आतंकियों ने अचानक फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में अमजद अली खान को गंभीर चोटें आईं, जबकि आतंकी जंगल की ओर भागने में सफल रहे। फिलहाल पूरे इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान जारी है।
गांव में अंतिम विदाई, हर आंख नम
शहीद अमजद अली खान का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव सलवा मेंढर पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। हजारों लोग अपने बहादुर बेटे को आखिरी सलाम देने पहुंचे। पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। हर तरफ गम और गर्व का मिला-जुला माहौल था।
आतंकवाद की असली कीमत
अमजद अली खान की शहादत ने एक बार फिर दिखा दिया कि आतंकवाद की कीमत केवल सुरक्षा बल ही नहीं, उनके परिवार और मासूम बच्चे भी चुकाते हैं। यह सिर्फ एक जवान की शहादत नहीं, एक परिवार के टूटने की कहानी है। देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। शहीद अमजद अली खान को नमन।




