आलोक कुमार | नई दिल्ली 9 जनवरी 2026
हाई कोर्ट के निर्देश और MCD की बढ़ती जिम्मेदारी
दिल्ली की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के आसपास संभावित बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में नगर निगम दिल्ली (MCD) को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ किया है कि इलाके में मौजूद अवैध निर्माण/अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई कानून के दायरे में, पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया (due process) के तहत ही की जाए। हाई कोर्ट ने MCD से कहा है कि किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले स्थल का विधिवत सर्वे, प्रभावित पक्षों को नोटिस, और सुनवाई का अवसर सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जामा मस्जिद जैसे ऐतिहासिक और संवेदनशील क्षेत्र में कदम उठाते समय कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक शांति और विरासत संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाए।
मामला उन याचिकाओं/शिकायतों से जुड़ा है जिनमें जामा मस्जिद परिसर के आसपास अवैध दुकानों, अस्थायी ढांचों और अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है। MCD की ओर से अदालत को बताया गया कि नगर निगम पहले से ही रिकॉर्ड की जांच और क्षेत्रीय निरीक्षण की प्रक्रिया में है। कोर्ट ने निगम को निर्देश दिया कि कार्रवाई चयनात्मक नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार समान रूप से होनी चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थल के मुख्य ढांचे से छेड़छाड़ का कोई प्रश्न नहीं है; कार्रवाई केवल कानूनन अवैध पाए गए निर्माणों तक सीमित रहेगी। साथ ही, किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद MCD पर अब यह जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वह कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करते हुए आगे बढ़े। वहीं, स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में चिंता का माहौल है, जबकि कुछ संगठनों ने इसे अतिक्रमण हटाने की आवश्यक कार्रवाई बताया है। अदालत के आदेश के बाद तत्काल बुलडोज़र कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। आगे की तस्वीर MCD की रिपोर्ट, सर्वे के निष्कर्ष और नोटिस प्रक्रिया के बाद ही साफ होगी। सभी की निगाहें अब इस पर हैं कि नगर निगम कानून, संवेदनशीलता और विरासत संरक्षण के संतुलन के साथ क्या कदम उठाता है।




