एबीसी डेस्क 31 दिसंबर 2025
पुराना वीडियो चर्चा में, सियासत के साथ रिश्तों की गर्माहट
राजनीति अक्सर भाषणों, रणनीतियों और आरोप–प्रत्यारोप तक सीमित मानी जाती है, लेकिन कभी-कभी इसमें रिश्तों की सादगी और मानवीय भावनाएं भी झलक जाती हैं। ऐसा ही एक पल इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा में है, जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार के दौरान उनकी होने वाली बहू अवीवा बेग उनके साथ नजर आई थीं। उस समय का एक पुराना वीडियो एक बार फिर वायरल हो रहा है और लोगों का ध्यान खींच रहा है। यह वीडियो उस दौर का है जब प्रियंका गांधी किसी चुनावी अभियान में व्यस्त थीं। उसी दौरान अवीवा बेग उनके साथ मंच और जनसंपर्क के दौरान दिखाई दी थीं। भीड़, नारे और राजनीतिक हलचल के बीच यह दृश्य लोगों को इसलिए खास लगा, क्योंकि इसमें राजनीति से इतर एक पारिवारिक जुड़ाव की झलक साफ दिखाई देती है।
चुनावी माहौल में एक निजी पल : कौन हैं अवीवा बेग
अवीवा बेग को लेकर लोगों की जिज्ञासा स्वाभाविक है। वे प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की होने वाली पत्नी मानी जाती हैं। अवीवा एक पढ़ी-लिखी, स्वतंत्र सोच वाली युवा महिला के रूप में जानी जाती हैं और कला व रचनात्मक क्षेत्र से उनका जुड़ाव बताया जाता है। चुनाव प्रचार में उनकी मौजूदगी को लोग राजनीतिक बयान से ज्यादा पारिवारिक समर्थन के तौर पर देख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों छाया वीडियो
पुराना वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब गांधी परिवार एक बार फिर राजनीतिक और निजी वजहों से सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को साझा करते हुए कह रहे हैं कि यह दिखाता है कि राजनीति के कठिन और थकाऊ माहौल में भी परिवार का साथ कितना मायने रखता है। कुछ लोग इसे सामान्य पारिवारिक पल मान रहे हैं, तो कुछ इसे गांधी परिवार की नई पीढ़ी की झलक के तौर पर देख रहे हैं।
राजनीति और निजी जीवन का संगम
प्रियंका गांधी खुद कई बार कह चुकी हैं कि राजनीति के साथ-साथ परिवार उनकी ताकत है। ऐसे में अवीवा बेग का चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ दिखना कोई औपचारिक राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि एक निजी और भावनात्मक सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। यह वीडियो इस बात की याद दिलाता है कि बड़े नेताओं के जीवन में भी रिश्ते उतने ही अहम होते हैं, जितनी सियासी जिम्मेदारियां।
चर्चा से आगे की कहानी
फिलहाल यह वीडियो किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं, बल्कि एक मानवीय पल के तौर पर देखा जा रहा है। चुनावी शोर-शराबे के बीच यह दृश्य लोगों को यह एहसास दिलाता है कि राजनीति सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि इंसानों और उनके रिश्तों की कहानी भी है—जहां परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है।




