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अब नए फोन में नहीं चलेगा पुराने नंबर का वॉट्सऐप

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आलोक कुमार । नई दिल्ली 2 दिसंबर 2025

सरकार का नया आदेश: सिम बदले तो बंद होगा वॉट्सऐप

भारत सरकार ने ऑनलाइन मैसेंजर प्लेटफॉर्मों के उपयोग के तरीकों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए यह स्पष्ट आदेश जारी किया है कि अब कोई भी संचार ऐप उस स्थिति में काम नहीं करेगा जब पंजीकृत सिम कार्ड फोन में मौजूद न हो। यह आदेश टेलिकम्युनिकेशन साइबरसिक्योरिटी अमेंडमेंट रूल्स 2025 के अधिकारों के तहत जारी किया गया है, और इसे लागू करने के लिए कंपनियों को 90 दिनों की सख्त समयसीमा दी गई है। इसका सीधा असर वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, जियोचैट, शेयरचैट और अन्य उन प्लेटफॉर्मों पर पड़ेगा जिनके करोड़ों उपयोगकर्ता एक बार लॉगिन के बाद लंबे समय तक बिना सिम के भी सेवाओं का उपयोग करते रहते हैं।

क्यों लिया गया यह निर्णय? साइबर अपराध और सुरक्षा का तर्क

दूरसंचार विभाग के अनुसार सरकार को ऐसी तकनीकी शिकायतें मिली थीं कि कई ऐप-आधारित संचार सेवाएं पंजीकृत सिम कार्ड हट जाने या बदल जाने के बाद भी काम करती रहती हैं। इस कमी का फायदा उठाकर कई साइबर अपराधी विदेशों में बैठे-बैठे भारतीय नंबरों से फर्जीवाड़ा कर रहे थे, जिससे न केवल धोखाधड़ी बढ़ रही थी बल्कि सुरक्षा तंत्र पर भी दबाव पड़ रहा था। विभाग का कहना है कि जब सिम कार्ड और ऐप के बीच बाइंडिंग बरकरार न रहे, तब असली उपयोगकर्ता और अपराधी के बीच का अंतर खत्म होने लगता है, और यही बिंदु सुरक्षा खतरे का कारण बन रहा था।

सख्त सिम बाइंडिंग की अनिवार्यता: अब लगातार जुड़ा होना जरूरी

सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि हर उपयोगकर्ता का मोबाइल ऐप लगातार उसी सिम कार्ड से जुड़ा रहे जिससे उसने अकाउंट बनाया था। यदि फोन में वह सिम मौजूद न हो, तो वॉट्सऐप जैसे ऐप को तुरंत सेवा बंद करनी होगी। तकनीकी भाषा में इसे सिम-बाइंडिंग कहा जाता है। यह पहली बार है कि भारत में किसी मैसेंजर सेवा को इतने गहरे स्तर पर टेलिकॉम पहचान से जुड़ने का आदेश दिया गया है, जो कंपनियों और उपयोगकर्ताओं दोनों के अनुभव को बदल देगा।

WhatsApp Web और कंप्यूटर सेवाओं पर भी सख्ती: हर 6 घंटे में लॉगआउट

सरकार ने सिर्फ मोबाइल ऐप तक दायरा सीमित नहीं रखा। वॉट्सऐप वेब और अन्य वेब-आधारित सेवाओं को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं। अब इन प्लेटफॉर्मों को हर 6 घंटे में अनिवार्य रूप से लॉगआउट करना होगा। इसका उद्देश्य अनधिकृत एक्सेस, रिमोट हैकिंग और चोरी-छिपे लॉगिन की घटनाओं को रोकना है। हालांकि उद्योग जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नियम उन पेशेवर उपयोगकर्ताओं के लिए बड़ी बाधा बन जाएगा जो अपने कंप्यूटर पर बिना फोन के भी इन सेवाओं का उपयोग करते हैं।

विदेश यात्रा करने वाले भारतीय होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

यह निर्देश खास तौर पर उन भारतीयों के लिए चुनौती बन सकता है जो अक्सर विदेश यात्रा करते हैं। अभी तक भारतीय उपयोगकर्ता विदेश में स्थानीय सिम का उपयोग करते हुए भी वॉट्सऐप को बिना किसी दिक्कत जारी रख पाते थे। नए नियम लागू होने के बाद जैसे ही उपयोगकर्ता भारतीय सिम निकालेंगे, उनका वॉट्सऐप तुरंत बंद हो जाएगा। इससे NRIs, स्टूडेंट्स, टूरिस्ट और बिजनेस ट्रैवलर्स को काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है, क्योंकि वे अपने भारतीय नंबर से जुड़े संपर्कों से तत्काल कट जाएंगे।

मल्टी-डिवाइस फीचर पर खतरा: उत्पादकता पर पड़ेगा असर

वॉट्सऐप का मल्टी-डिवाइस फीचर—जिसे पिछले कुछ वर्षों में काफी सराहा गया—अब गंभीर चुनौती में आ जाएगा। पेशेवर लोग जो अपने कंप्यूटर या टैबलेट पर वॉट्सऐप वेब का लगातार उपयोग करते थे, उन्हें हर छह घंटे बाद दोबारा प्रमाणिकता प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इससे न केवल उपयोग का अनुभव बिगड़ेगा बल्कि कई कामकाजी क्षेत्रों में संचार की गति भी धीमी होगी। उद्योग जगत के अनुसार यह बदलाव डिजिटल उत्पादकता को गहरा झटका दे सकता है।

साइबर अपराध सचमुच रुकेगा? विशेषज्ञों की शंकाएँ

सरकार का दावा है कि यह नियम साइबर अपराधों पर काबू पाने में अहम साबित होगा, लेकिन कुछ विशेषज्ञों की राय अलग है। उनका कहना है कि कई अपराधी पहले से ही फर्जी दस्तावेज़ों और ‘म्यूल’ पहचान का उपयोग करके अवैध रूप से सिम कार्ड हासिल करते हैं। जब मूल सिम ही नकली हो, तब सिम बाइंडिंग कितनी प्रभावी होगी—यह अभी साफ नहीं है। हालांकि अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम कम-से-कम एक डिजिटल loophole को जरूर बंद करेगा, जिसका दुरुपयोग व्यापक स्तर पर हो रहा था।

टेलिकॉम उद्योग का रुख: पहले ही समर्थन दे चुका था

दिलचस्प बात यह है कि टेलिकॉम इंडस्ट्री पहले से ही इस बदलाव का समर्थन करती रही है। सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने अभी कुछ महीने पहले कहा था कि वर्तमान सिस्टम में ऐप केवल प्रारंभिक सत्यापन के दौरान सिम से जुड़ता है, उसके बाद भले ही सिम बदल जाए, ऐप काम करता रहता है—जो सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम भरा है। अब सरकार ने इंडस्ट्री की ही सिफारिशों को कानूनी रूप देकर लागू कर दिया है।

सुविधा बनाम सुरक्षा—बहस अभी जारी है

सरकार का यह कदम तकनीकी रूप से एक बड़ा सुधार है और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी जोर पकड़ रहा है कि क्या उपभोक्ताओं की सुविधा को बहुत अधिक कुर्बान किया जा रहा है? फोन बदलने वाले उपयोगकर्ताओं, विदेश यात्रा करने वालों, कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं और मल्टी-डिवाइस कामकाज पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह नियम सुरक्षा को बढ़ाएगा या डिजिटल दुनिया में नई परेशानियाँ पैदा करेगा।

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