एबीसी डेस्क 18 दिसंबर 2025
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लोकसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिषेक बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए टीएमसी को कांग्रेस की ज़रूरत नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल मिलकर केंद्र सरकार के खिलाफ इंडिया गठबंधन के तहत रणनीति बनाने की बात कर रहे हैं। उनके बयान ने यह संकेत दे दिया है कि राज्य स्तर पर टीएमसी अपने रास्ते खुद तय करना चाहती है।
अभिषेक बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही टीएमसी अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन उनकी राजनीति की प्राथमिकता किसी दल को खुश करना नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के लोगों से जुड़े मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता के सवाल, उनकी समस्याएं और उनके हित ही टीएमसी की असली लड़ाई हैं। उनके मुताबिक बंगाल की राजनीति को दिल्ली के समीकरणों से नहीं, बल्कि राज्य की ज़मीनी हकीकत से समझना चाहिए। यह बयान साफ तौर पर यह दर्शाता है कि टीएमसी राष्ट्रीय गठबंधन में रहते हुए भी राज्य में पूरी तरह स्वतंत्र भूमिका निभाना चाहती है।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस और टीएमसी के बीच बंगाल में किसी भी तरह के चुनावी तालमेल की संभावना अब बेहद कम रह गई है। कांग्रेस पहले ही बंगाल में कमजोर स्थिति में है, और अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने उस दूरी को और साफ कर दिया है। टीएमसी यह संदेश दे रही है कि उसने अपनी राजनीतिक ताकत और जनाधार के बल पर राज्य में बार-बार जीत हासिल की है और आगे भी वह अपने दम पर मैदान में उतरेगी।
हालांकि राजनीति में अंतिम शब्द कभी नहीं कहा जा सकता। यह भी सच है कि राजनीति संभावनाओं का खेल है, जहां आज जो असंभव लगता है, वह कल संभव हो सकता है। आने वाले समय में हालात, रणनीति और राजनीतिक दबाव किस दिशा में मोड़ लेते हैं, यह देखना अभी बाकी है। लेकिन फिलहाल अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने इतना साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी किसी बैसाखी के सहारे नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर आगे बढ़ने के मूड में है।




