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WATCH VIDEO — खोकोना की वादियों में सुरों का जादू, ‘इकोज़ इन द वैली’ महोत्सव ने बांधा समां

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एबीसी नेशनल न्यूज | 25 जनवरी 2026

नेपाल की काठमांडू घाटी में बसे खूबसूरत गांव खोकोना में इस बार संगीत का खास जादू देखने को मिला। यहां ‘इकोज़ इन द वैली’ संगीत महोत्सव का 10वां संस्करण बड़े उत्साह और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। पहाड़ियों और खुली वादियों के बीच जब सुरों की गूंज फैली, तो माहौल कुछ अलग ही रंग में रंग गया।

इस महोत्सव में नेपाल और भारत के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का दिल जीत लिया। काठमांडू स्थित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के कलाकारों ने शास्त्रीय हिंदुस्तानी संगीत पेश किया। तबले और हारमोनियम की संगत में जब रागों की मधुर धुनें बही, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कई लोग आंखें बंद कर संगीत का आनंद लेते नजर आए। कुछ बुजुर्गों ने कहा कि उन्हें ऐसा सुकून बहुत दिनों बाद मिला है।

वहीं भारत के कोलकाता से आए गैबू (Gaboo) ग्रुप ने मंच पर आते ही माहौल बदल दिया। उनके पॉप संगीत ने खास तौर पर युवाओं में जबरदस्त जोश भर दिया। जैसे ही उन्होंने अपनी धुनें शुरू कीं, लोग झूमने लगे। कई युवा मोबाइल फोन से वीडियो बनाते दिखे, तो कुछ तालियों और सीटी से कलाकारों का हौसला बढ़ाते रहे।

खोकोना की खुली वादियों में जब नेपाली और भारतीय संगीत का संगम हुआ, तो बड़ी संख्या में लोग इसे देखने और सुनने पहुंचे। स्थानीय लोग भी इस आयोजन को लेकर काफी उत्साहित थे। कई परिवार अपने बच्चों के साथ आए थे, ताकि वे भी इस सांस्कृतिक मेल का हिस्सा बन सकें। गांव की गलियों में मेहमानों की चहल-पहल और चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही थी।

दर्शकों ने कलाकारों की हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति को करीब से समझने का मौका भी देते हैं। एक स्थानीय युवक ने कहा, “हमने टीवी और इंटरनेट पर भारतीय संगीत सुना था, लेकिन यहां सामने से सुनना अलग ही अनुभव रहा।”

महोत्सव के आयोजकों ने बताया कि ‘इकोज़ इन द वैली’ का मकसद सिर्फ संगीत पेश करना नहीं, बल्कि नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ सालों में यह महोत्सव धीरे-धीरे बड़ा हुआ है और अब यह खोकोना की पहचान बन चुका है।

इस 10वें संस्करण ने यह साफ कर दिया कि संगीत किसी सीमा को नहीं मानता। भाषा, देश और संस्कृति की दीवारें यहां खुद-ब-खुद टूटती नजर आईं। सुरों ने दिलों को जोड़ा और लोगों को एक-दूसरे के करीब ले आया।

‘इकोज़ इन द वैली’ महोत्सव का यह संस्करण इस बात का गवाह रहा कि जब संगीत बोलता है, तो हर कोई उसकी भाषा समझ लेता है। खोकोना की वादियों में गूंजे ये सुर लंबे समय तक लोगों की यादों में बने रहेंगे।

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