एबीसी नेशनल न्यूज | 1 फरवरी 2026
नई दिल्ली। देश में बढ़ते प्रदूषण को लेकर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार और संसद पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि बीते कुछ दिनों में उन्हें देशभर से हज़ारों संदेश मिले हैं, जिनमें लोगों ने बताया है कि प्रदूषण किस तरह उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है। इन संदेशों में सबसे ज़्यादा जो बात सामने आई है, वह है डर—अपने बच्चों के लिए, बुज़ुर्ग माता-पिता के लिए और आने वाले कल को लेकर। यह डर आज देश के लगभग हर बड़े शहर के परिवारों में महसूस किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदूषण अब केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है। उनका कहना है कि जहरीली हवा बच्चों के फेफड़ों, बुज़ुर्गों के दिल और आम आदमी की सेहत पर सीधा असर डाल रही है। अस्पतालों में सांस, एलर्जी और दिल से जुड़ी बीमारियों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार इस संकट को उतनी गंभीरता से नहीं ले रही, जितनी ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में गंभीर और विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी के मुताबिक, यह कोई राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की सेहत और भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को इस पर तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए, न कि केवल घोषणाओं और रिपोर्टों तक खुद को सीमित रखना चाहिए।
बजट को लेकर भी राहुल गांधी ने सरकार से सीधी अपेक्षा जताई है। उन्होंने कहा कि आने वाले बजट में प्रदूषण से निपटने के लिए वास्तविक संसाधन और प्रभावी समाधान दिखाई देने चाहिए। उनका कहना है कि अगर सरकार सच में गंभीर है, तो उसे साफ हवा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा और शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए ठोस योजनाओं पर पैसा खर्च करना होगा।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश की जनता अब भाषण और खोखले वादे नहीं चाहती। लोग न तो नई रिपोर्टों की मांग कर रहे हैं और न ही लंबे-चौड़े दावों की। उनकी मांग बेहद सीधी और बुनियादी है—उन्हें साफ हवा चाहिए, ताकि वे और उनके बच्चे स्वस्थ जीवन जी सकें।
कांग्रेस नेता का कहना है कि अगर समय रहते प्रदूषण पर काबू नहीं पाया गया, तो इसके नतीजे आने वाले वर्षों में और भी भयावह होंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस संकट को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि मानवीय और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए। फिलहाल, राहुल गांधी के इस बयान के बाद प्रदूषण और स्वास्थ्य को लेकर एक बार फिर देशव्यापी बहस तेज़ होने की संभावना है।




