एबीसी नेशनल न्यूज 24 जनवरी 2026
पुंछ (जम्मू-कश्मीर)। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में हुई भारी बर्फबारी ने पूरे इलाके को सफेद चादर में ढक दिया है। 22–23 जनवरी की रात से शुरू हुई बर्फबारी 24 जनवरी तक चलती रही। नतीजा यह हुआ कि सड़कें, घरों की छतें और पहाड़ियां बर्फ से लद गईं और जनजीवन पूरी तरह ठप सा हो गया। कुछ इलाकों में कई फीट तक बर्फ जम गई है। मुगल रोड पर चंदीमार्ह से आगे हालात सबसे खराब हैं। मेंढर में करीब 15 साल बाद इतनी भारी बर्फबारी हुई है। लोग एक तरफ इसकी खूबसूरती देखकर खुश हैं, तो दूसरी तरफ रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल में पड़ गई है। राजौरी-पुंछ क्षेत्र के लोरान मंडी में भी 7–8 इंच तक बर्फ जमी है।
भारी बर्फबारी के चलते पुंछ जिला बाकी जम्मू-कश्मीर से लगभग कट गया है। जम्मू-राजौरी-पुंछ नेशनल हाईवे (NH-144A) भीमबर गली से जरन वाली गली तक बंद है। पुंछ-शोपियां को जोड़ने वाली मुगल रोड भी पूरी तरह ठप है, जिसे खोलने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की टीमें लगातार बर्फ हटाने में जुटी हैं। इसके अलावा सुरनकोट–डीकेजी–थन्नामंडी, मेंढर–बलाकोट–मंजकोट रोड जैसी कई अहम सड़कें भी बंद पड़ी हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे (NH-44) दूसरे दिन भी बंद रहा, जहां कई जगह फिसलन और बर्फ की मोटी परत जमा है।
गांवों को जोड़ने वाली अंदरूनी सड़कें बंद होने से जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई जगह यात्री वाहन रास्ते में फंस गए। पुंछ में करीब 75 यात्रियों को पुलिस और प्रशासन ने रेस्क्यू किया। महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति भी ठप है।
बर्फबारी के कारण स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी है। श्रीनगर, सोनमर्ग, गुलमर्ग और शोपियां जैसे इलाकों में भी जमकर बर्फ गिरी है। गुलमर्ग में 45 से 60 सेंटीमीटर तक, शोपियां में करीब 55 सेंटीमीटर और पहलगाम में 17 सेंटीमीटर तक बर्फ दर्ज की गई है। श्रीनगर में भी हल्की बर्फबारी हुई।
प्रशासन और BRO की टीमें युद्ध स्तर पर सड़कों को खोलने में लगी हैं। पुलिस लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। लोगों से अपील की गई है कि बिना जरूरी काम के यात्रा न करें और मौसम विभाग की सलाह मानें।
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ अब कमजोर पड़ चुका है। अगले कुछ दिनों में भारी बर्फबारी का नया दौर आने की संभावना नहीं है, लेकिन ठंड और शीतलहर बनी रहेगी। पुंछ और किश्तवाड़ समेत छह जिलों में हिमस्खलन का हाई अलर्ट भी जारी किया गया है। लोगों को पहाड़ी इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
मुश्किलों के बीच बड़ी राहत की बात यह भी है कि लंबे सूखे के बाद हुई यह बर्फबारी कश्मीर के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। इससे नदियों, झीलों और जलस्रोतों में पानी बढ़ेगा, जो खेती और पीने के पानी दोनों के लिए जरूरी है। पर्यटन स्थलों पर बर्फ की चादर देखकर सैलानी भी खुश हैं। हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं, लेकिन सड़कें पूरी तरह खुलने में अभी वक्त लग सकता है। स्थानीय लोग बर्फ की खूबसूरती का लुत्फ तो उठा रहे हैं, मगर रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।




