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WATCH VIDEO : 24 प्रांतों में तबाही; 51 बच्चों समेत लगभग 300 मौतें, ईरान की जवाबी कार्रवाई से खाड़ी देशों में अफरा-तफरी, तेल अवीव में भी कोहराम

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एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान/मिनाब/कुवैत सिटी/दुबई/तेल अवीव | 28 फरवरी 2026

मध्य-पूर्व इस समय ऐसे भंवर में फंसा है, जहां हर घंटे हालात बदल रहे हैं। शनिवार को United States और Israel ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए Iran के कई हिस्सों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी और स्थानीय मीडिया के अनुसार, इन हमलों का दायरा 24 प्रांतों तक फैल गया है। शुरुआती आंकड़ों में 200 से अधिक मौतों की पुष्टि हुई थी, लेकिन देर रात तक यह संख्या बढ़कर लगभग 300 तक पहुंच गई। घायलों की संख्या 1000 से अधिक बताई जा रही है।

यह संघर्ष अब केवल सैन्य प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके मानवीय प्रभाव ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। सबसे हृदयविदारक घटना दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के शहर Minab में सामने आई, जहां एक प्राथमिक बालिका विद्यालय मलबे में बदल गया। ईरानी राज्य मीडिया के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 51 बच्चियों की जान गई है। स्थानीय न्यायिक सूत्रों ने मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई है। स्कूल परिसर में बिखरी किताबें, जले हुए बैग और टूटी डेस्क की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। ईरान में गुस्से और शोक की लहर है—लोग इसे “अक्षम्य अपराध” बता रहे हैं।

हमलों का पैमाना और रणनीतिक निशाने

तेहरान, इस्फहान, क़ुम, कराज और केरमानशाह जैसे शहरों में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि सैन्य और रणनीतिक परिसरों के साथ-साथ कुछ नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei से जुड़े परिसरों के आसपास भी हमले हुए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी संभव नहीं हो सकी है।

वॉशिंगटन और तेल अवीव की ओर से बयान आया है कि यह कार्रवाई “रक्षात्मक” और “पूर्व-निवारक” थी, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं और संभावित खतरों को कम करना है। अमेरिकी सूत्रों का कहना है कि ईरान के कुछ ठिकाने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बने हुए थे। दूसरी ओर तेहरान इसे “खुली आक्रामकता” बता रहा है और कह रहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई: तेल अवीव में सायरन

हमलों के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इज़राइल की आर्थिक राजधानी Tel Aviv में हवाई हमले के सायरन गूंजे। नागरिकों को बंकरों में शरण लेने की सलाह दी गई। इज़राइली अधिकारियों ने कई मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन कुछ इलाकों में धमाकों और आग लगने की खबरें भी सामने आई हैं। अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और आपात सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है।

तेल अवीव, हाइफ़ा और दक्षिणी इज़राइल के कई हिस्सों में लोगों ने रात बंकरों में बिताई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में आसमान में इंटरसेप्टर मिसाइलों की रोशनी और दूर से आती धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

खाड़ी देशों में हड़कंप

ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल इज़राइल तक सीमित नहीं रही। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। Kuwait के Kuwait International Airport पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें कुछ कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं और एक इमारत को सीमित नुकसान पहुंचा।

बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में भी सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। कई देशों ने अस्थायी रूप से अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। दुबई और दोहा के हवाई अड्डों पर उड़ानों में देरी और रद्दीकरण की खबरें हैं। तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो आपूर्ति बाधित हो सकती है।

कूटनीतिक मोर्चा और अंतरराष्ट्रीय चिंता

Oman के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी, जो हाल तक अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं की मध्यस्थता कर रहे थे, ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की दिशा में कदम उठाने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठक बुलाने की चर्चा है। यूरोपीय संघ और एशियाई देशों ने भी बयान जारी कर तनाव कम करने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह टकराव नियंत्रण से बाहर हुआ तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक पड़ेगा।

मानवीय संकट की आशंका

ईरान के 24 प्रांतों में फैले हमलों ने अस्पतालों और राहत एजेंसियों पर भारी दबाव डाल दिया है। रेड क्रिसेंट और अन्य स्वयंसेवी संगठन घायलों के इलाज और राहत कार्यों में जुटे हैं। कई जगह बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

मिनाब की घटना ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है। बच्चों की मौत की खबरों के बाद मानवाधिकार संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। यदि नागरिक प्रतिष्ठानों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है, तो यह युद्ध कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव

इस टकराव के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। ईरान में नेतृत्व के खिलाफ पहले से मौजूद असंतोष और बाहरी हमलों का दबाव राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। वहीं इज़राइल और अमेरिका के लिए भी यह दांव जोखिम भरा है—लंबे युद्ध की स्थिति में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है।

तेहरान, रियाद, दोहा, अबू धाबी और तेल अवीव में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। कई देशों ने अपने नागरिकों को यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

आगे क्या?

स्थिति अभी भी बेहद तरल है। हर नए हमले और हर नए बयान के साथ समीकरण बदल रहे हैं। 51 मासूम बच्चों की मौत और सैकड़ों नागरिकों की जान जाने के बाद यह संघर्ष केवल सैन्य रणनीति का मामला नहीं रह गया—यह मानवीय त्रासदी बन चुका है।

आने वाले दिन तय करेंगे कि क्या कूटनीति इस आग को शांत कर पाएगी या खाड़ी क्षेत्र लंबे और विनाशकारी युद्ध की चपेट में आ जाएगा। फिलहाल पूरे मध्य-पूर्व में दहशत, अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल है—और दुनिया सांस रोककर अगली खबर का इंतजार कर रही है।

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