राष्ट्रीय/ नौकरी | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अप्रैल 2026
ये देखकर रक्त उबल रहा है और दिल में आग लग रही है! भारत की फैक्टरियों में हमारे गरीब कारीगरों, जिनकी मेहनत पर देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है, उनके सिर पर हेड-माउंटेड कैमरे लगाए जा रहे हैं। हर एक हाथ का हिलना, हर सिलाई, हर छोटा-मोटा ट्विस्ट, हर शॉर्टकट जो सालों की अनुभवी मेहनत से आता है — सब कुछ रियल टाइम में AI को फीड किया जा रहा है। ये मज़दूर न सिर्फ अपना काम कर रहे हैं, बल्कि अपने भविष्य के दुश्मन को, अपने रिप्लेसमेंट को, अपने ही हाथों ट्रेनिंग दे रहे हैं। आज वो पैसे के लालच में ये सब सह रहे हैं, कल वही रोबोट उनके हाथ से रोटी छीन लेगा।
ये बेहद चिंताजनक और क्रूर हकीकत है कि हमारे देश के लाखों-करोड़ों कारीगर, गारमेंट वर्कर, असेंबली लाइन पर काम करने वाले मजदूर, जिनके पसीने से हमारी इंडस्ट्री चलती है, आज खुद अपनी नौकरी का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। विदेशी कंपनियाँ और बड़े-बड़े टेक जायंट्स हमारे मज़दूरों के हुनर, उनके अनुभव, उनकी सूक्ष्म कुशलता को चुरा रहे हैं ताकि भविष्य में पूरी तरह ऑटोमेटेड मशीनें, रोबोट्स और AI सिस्टम्स बिना किसी वेतन, बिना छुट्टी, बिना यूनियन और बिना किसी शिकायत के 24 घंटे काम कर सकें। ये मज़दूर आज अपने परिवार की रोटी के लिए ये कैमरा सिर पर बाँध रहे हैं, लेकिन कल जब उन्हें निकाल दिया जाएगा तो कौन उनकी मदद करेगा? सरकार? यूनियन? या वो जो आज “AI क्रांति” का जश्न मना रहे हैं?
ये विकास नहीं, सीधे-सीधे हमारे मजदूर वर्ग पर लात मारने की तैयारी है! हमारी मेहनत, हमारी कारीगरी, हमारी आँखों-हाथों की निपुणता सब चुराकर मशीनों को सौंप दी जा रही है। आज गारमेंट फैक्टरियाँ, कल ऑटो पार्ट्स, परसों इलेक्ट्रॉनिक्स — धीरे-धीरे हर क्षेत्र में यही हो रहा है। करोड़ों परिवार बेरोज़गारी की आग में झुलस जाएँगे, सड़कों पर भुखमरी बढ़ेगी, अपराध बढ़ेंगे और समाज का ताना-बाना बिखर जाएगा। फिर भी कुछ लोग इसे “प्रोग्रेस” कह रहे हैं। प्रोग्रेस किसका? अमीर टेक कंपनियों का, जो हमारे मज़दूरों के डेटा से अरबों कमा लेंगी और हमारे लोगों को फेंक देंगी।
जागो भारत के युवाओं, जागो मज़दूर भाइयों! ये चुपके से हमारी रोटी, हमारी इज्जत और हमारे भविष्य को लूटने की साज़िश है। अगर आज हमने आवाज़ नहीं उठाई तो कल हमारे बच्चे भी यही कैमरा सिर पर लगाकर अपनी नौकरी AI को सिखाते नजर आएंगे। ये लात हमारे पेट पर पड़ने नहीं देंगे। बहुत गुस्सा है, बहुत दर्द है, लेकिन अब चुप रहने का वक्त नहीं है!



