Home » Politics » ओवैसी की चेतावनी से डर गए थे यूसुफ पठान? महुआ का हमला—“गद्दार निकले, हिम्मत नहीं थी!”

ओवैसी की चेतावनी से डर गए थे यूसुफ पठान? महुआ का हमला—“गद्दार निकले, हिम्मत नहीं थी!”

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 जून 2026

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मची बगावत के बीच अब एक नया और विस्फोटक राजनीतिक विवाद सामने आ गया है। जम्मू-कश्मीर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत टंडन के सोशल मीडिया पोस्ट ने यूसुफ पठान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपों और जवाबी आरोपों के इस दौर ने टीएमसी में टूट की कहानी को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

पूरा विवाद उस सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ जिसमें सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने दावा किया कि संसद के पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष SIR और अन्य मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहा था। उनके अनुसार उस समय टीएमसी सांसद हमेशा की तरह विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे और यूसुफ पठान भी उनके साथ मौजूद थे। रुहुल्लाह का दावा है कि उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि एक प्रमुख मुस्लिम सांसद ने यूसुफ पठान को अलग ले जाकर प्रदर्शन से हट जाने के लिए कहा। रुहुल्लाह के अनुसार बातचीत के बाद यूसुफ पठान प्रदर्शन छोड़कर अपनी सीट पर वापस आ गए और उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।

रुहुल्लाह मेहदी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि बाद में जब उन्होंने यूसुफ पठान से पूछा कि आखिर क्या हुआ, तो उन्होंने कथित तौर पर बताया कि उस सांसद ने उन्हें बीजेपी के खिलाफ खड़े न होने की सलाह दी थी। दावा किया गया कि उन्हें यह भी कहा गया कि यदि वे बीजेपी के खिलाफ सक्रिय राजनीति करेंगे तो गुजरात में उनके घर पर बुलडोजर चल सकता है। रुहुल्लाह ने लिखा कि उस बातचीत के बाद यूसुफ पठान बुरी तरह सहमे हुए नजर आ रहे थे।

मामला यहीं नहीं रुका। कुछ ही घंटों बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि यूसुफ पठान को चेतावनी देने वाले नेता AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी थे। महुआ ने बेहद तीखी भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा कि उन्होंने उस समय यूसुफ पठान का मनोबल बढ़ाया था और उन्हें भरोसा दिलाया था कि पूरी पार्टी उनके साथ खड़ी है। लेकिन बाद में वही यूसुफ पठान टीएमसी छोड़कर बागी खेमे में चले गए। महुआ ने उन्हें “गद्दार”, “डरपोक” और “बिना हिम्मत वाला व्यक्ति” तक कह दिया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई।

इस विवाद में एक और बड़ा नाम तब जुड़ गया जब वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विशेषज्ञ प्रशांत टंडन ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी की। प्रशांत टंडन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यदि आगा रुहुल्लाह का दावा सही है तो यूसुफ पठान का डर पूरी तरह निराधार था। उन्होंने कहा कि यदि यूसुफ पठान या उनके परिवार के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई होती तो केवल उनकी पार्टी ही नहीं बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक और राजनीतिक वर्ग का बड़ा हिस्सा उनके समर्थन में खड़ा होता। टंडन ने यह भी कहा कि बागी खेमे के साथ खड़े होकर यूसुफ पठान ने शायद उस राजनीतिक और नैतिक समर्थन को खो दिया है जो उनके साथ मजबूती से खड़ा हो सकता था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक सांसद के डर या साहस का मामला नहीं है, बल्कि यह विपक्षी राजनीति के भीतर मौजूद अविश्वास, दबाव और अंदरूनी संघर्ष को भी उजागर करता है। टीएमसी में हालिया बगावत के बाद पहले ही कई नेता एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में यूसुफ पठान को लेकर सामने आए इन दावों ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक न तो यूसुफ पठान की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया आई है और न ही असदुद्दीन ओवैसी ने इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक जवाब दिया है। इसलिए सोशल मीडिया पर लगाए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इतना तय है कि टीएमसी की टूट, यूसुफ पठान की भूमिका और विपक्षी राजनीति के भीतर की खींचतान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।

फिलहाल सवाल वही है जो राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है—क्या यूसुफ पठान वास्तव में किसी राजनीतिक दबाव से डर गए थे, या यह टीएमसी की अंदरूनी लड़ाई का नया अध्याय है? जवाब अभी बाकी है, लेकिन आरोपों ने सियासत का तापमान जरूर बढ़ा दिया है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted