राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 जून 2026
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कीर्ति आज़ाद ने भारतीय जनता पार्टी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें पार्टी बदलने के लिए करोड़ों रुपये का प्रस्ताव दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अपनी राजनीतिक विचारधारा से समझौता करने से इनकार कर दिया, तो उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा और अंततः उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी हटा ली गई। कीर्ति आज़ाद का कहना है कि यह केवल उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव की एक बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।
चार बार लोकसभा सांसद और एक बार विधायक रह चुके कीर्ति आज़ाद ने कहा कि इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद आज उनके पास कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी वजह थी कि उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई, जबकि वे लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और कई संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता और दल बदलने से इनकार करने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है।
टीएमसी सांसद ने दावा किया कि उन्हें सीधे या परोक्ष रूप से यह संदेश दिया गया कि यदि वे राजनीतिक रुख बदलते हैं तो उनके लिए रास्ते आसान हो सकते हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी कीमत पर अपनी राजनीतिक निष्ठा नहीं बदली। उनके अनुसार राजनीति कोई बाजार नहीं है जहां जनादेश और विचारधारा की खरीद-फरोख्त हो सके।
कीर्ति आज़ाद ने अपने पड़ोसी और भाजपा नेता एस.एस. अहलूवालिया का उदाहरण देते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अहलूवालिया चुनाव हार चुके हैं और वर्तमान में सांसद भी नहीं हैं, लेकिन उनके पास सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस और होमगार्ड की सुरक्षा उपलब्ध है। दूसरी ओर, एक सक्रिय सांसद होने के बावजूद उनके पास किसी प्रकार की सुरक्षा नहीं है। उन्होंने पूछा कि सुरक्षा के मानदंड आखिर क्या हैं और किन आधारों पर तय किए जाते हैं।
उनके आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी उथल-पुथल चल रही है। तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों के दल बदलने, बगावत और नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चाओं के बीच कीर्ति आज़ाद का बयान और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के दिनों में कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव, जांच एजेंसियों और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल कर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि भाजपा लगातार ऐसे आरोपों को खारिज करती रही है। भाजपा का कहना है कि उसकी राजनीति जनसमर्थन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर आधारित है तथा विपक्ष अपने राजनीतिक संकटों को छिपाने के लिए इस तरह के आरोप लगाता रहता है। पार्टी की ओर से कीर्ति आज़ाद के ताजा आरोपों पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कीर्ति आज़ाद के बयान केवल व्यक्तिगत शिकायत नहीं हैं, बल्कि वे वर्तमान राजनीतिक माहौल में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास को भी उजागर करते हैं। यदि इन आरोपों को लेकर औपचारिक शिकायत, जांच या राजनीतिक अभियान शुरू होता है तो यह मामला राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल कीर्ति आज़ाद के आरोपों ने बंगाल की सियासत से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि भाजपा इन आरोपों का क्या जवाब देती है और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर संबंधित एजेंसियां क्या स्पष्टीकरण देती हैं।




