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बांग्लादेश में फिर हिंसा: अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतारा

अंतरराष्ट्रीय डेस्क 25 दिसंबर 2025

बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला में एक और भयावह घटना सामने आई है, जहाँ 29 वर्षीय हिंदू युवक अमृत मंडल, जिन्हें स्थानीय लोग सम्राट के नाम से भी जानते थे, को भीड़ ने घेर कर बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। यह घटना बुधवार देर शाम स्थानीय समयानुसार लगभग 11 बजे होसाइंडांगा के पुराने बाजार के पास हुई, जब कुछ लोगों ने अमृत पर जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के आरोप लगाए और देखते ही देखते मामला भीड़ हिंसा में बदल गया। पुलिस के अनुसार भीड़ ने उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसे बाद में पांघशा उपजिला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि घटना के बाद जांच शुरू कर दी गयी है और दोषियों की पहचान के लिए छानबीन जारी है। अधिकारी इस बात की भी पुष्टि कर रहे हैं कि इस हत्या की पृष्ठभूमि में लगाए गए आरोपों और अफ़वाहों के कारण ही भीड़ ने संयम खो दिया था। यह मामला बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती असुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

यह घटना केवल कुछ दिनों पहले हुई हत्या की कड़ी में आती है, जब दीपू चंद्र दास नामक 27 वर्षीय हिंदू युवक को भी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था, और उसके शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया था, जिससे पूरे देश में और पड़ोसी भारत में भी व्यापक रोष देखने को मिला था। इन लगातार हो रही घटनाओं ने बांग्लादेश में धार्मिक और सामाजिक तनाव की तस्वीर को और भी गंभीर बना दिया है।

आलोचकों और मानवाधिकार समूहों ने इन हत्याओं की निंदा की है और न्याय सुनिश्चित करने तथा भीड़ हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। कई लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में आरोपों के फैलते ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है, और इससे पहले कि कानून अपना काम कर सके, निर्दोष या आरोपियों के साथ भी बिना जांच के भीड़ फौरी सजा दे देती है, जो समाज और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए खतरनाक संकेत हैं।

इन घटनाओं के बीच बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा, कानून के शासन और सामाजिक सामंजस्य पर व्यापक चिंता व्याप्त है, और देश के भीतर एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की भीड़ हिंसा को रोकने और न्याय के लिये मजबूत प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।

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