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अमेरिकी रिपोर्ट में ‘पाकिस्तान की सैन्य सफलता’ का दावा—मोदी सरकार की कूटनीति पर कांग्रेस का हमला, संसद में जवाब की मांग

सुनील कुमार | नई दिल्ली 20 नवंबर 2025

नई दिल्ली। एक आधिकारिक अमेरिकी रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर किए गए चौंकाने वाले दावों ने नई दिल्ली की कूटनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने रिपोर्ट में शामिल उस हिस्से पर तीखी प्रतिक्रिया दी है जिसमें अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को “इंसर्जेंट अटैक” बताया गया है और 7–10 मई के चार दिन चले सैन्य संघर्ष में “पाकिस्तान की भारत पर सैन्य सफलता” का उल्लेख किया गया है। US-China Economic and Security Review Commission की यह वार्षिक रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई है—और भारत में राजनीतिक भूचाल उसी के बाद आया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को “भारत की कूटनीति पर फिर एक गंभीर झटका” बताया और सवाल उठाया कि आखिर मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर चुप क्यों हैं।

जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि यह रिपोर्ट न केवल भारत की स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है, बल्कि वह कथित तौर पर पाकिस्तान द्वारा दावे की गई “सैन्य बढ़त” को भी अमेरिका की ओर से संस्थागत वैधता देती दिख रही है। उन्होंने कहा कि US के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 60 बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर रोका”, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर कभी देश के सामने कोई तथ्य नहीं रखा। रमेश ने सवाल उठाया कि अब जबकि यह रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस में दर्ज हो चुकी है, क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय औपचारिक रूप से विरोध दर्ज कराएंगे या फिर भारत की चुप्पी को अमेरिका और पाकिस्तान अपने पक्ष में पढ़ेंगे? उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति की “गिरती साख” और “कूटनीतिक विफलता” का सबूत बताया।

रिपोर्ट के पन्नों पर नजर डालें तो विवाद यहीं तक सीमित नहीं है। दस्तावेज़ के अनुसार पाकिस्तान ने इस संघर्ष में “चीनी हथियारों और चीनी खुफिया तंत्र” का सहारा लिया और संघर्ष के दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने 50 वर्षों में पहली बार एक-दूसरे की सीमा में पहले से कहीं अधिक गहराई तक लक्ष्य साधे। रिपोर्ट यह भी कहती है कि पाकिस्तान के इस “सैन्य प्रदर्शन” ने चीन को “अपनी अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रचार करने और भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में सैन्य मनोवैज्ञानिक बढ़त अर्जित करने” का मौका दिया। यह बात भारत के लिए इसलिए और संवेदनशील है क्योंकि यह संघर्ष प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सार्वजनिक रूप से कमोबेश खामोशी से निपटा गया था, जबकि विपक्ष लगातार तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग करता रहा।

कांग्रेस ने कहा कि अमेरिका की यह रिपोर्ट सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि, कूटनीतिक विश्वसनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा के दस्तावेज़ीकरण से जुड़ा गंभीर मामला है। पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार न तो विश्व शक्तियों को तथ्यात्मक जानकारी दे पा रही है, न ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के पक्ष का आक्रामक बचाव। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में आकर यह बताना होगा कि आखिर क्या कारण था कि भारत पहलगाम हमले के बाद हुए संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “भारत की निर्णायक सफलता” के रूप में स्थापित नहीं कर पाया? और क्यों अमेरिकी रिपोर्टों में पाकिस्तान के दावों को ज्यादा महत्व मिल रहा है जबकि भारत की ओर से कोई तथ्यात्मक प्रतिक्रिया तक दर्ज नहीं की गई?

कुल मिलाकर, अमेरिकी आयोग की इस रिपोर्ट ने भारत की विदेश नीति, सुरक्षा रणनीति और प्रधानमंत्री की चुप्पी पर बहस को नई ऊंचाइयों पर ला खड़ा किया है। कांग्रेस इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए संसद में तत्काल चर्चा की मांग कर रही है, जबकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसी रिपोर्टें भविष्य में भारत की सामरिक स्थिति और वैश्विक धारणा पर गहरा असर छोड़ सकती हैं। अब नजर इस पर है कि मोदी सरकार क्या इस रिपोर्ट पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराती है या फिर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह विवाद और गहराता चला जाता है।

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