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रांची IIIT में छात्र की मौत पर बवाल: CPR रोकने और एंबुलेंस में ड्राइवर न होने के आरोप

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रांची | 11 अक्टूबर 2026

झारखंड की राजधानी रांची स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) के हॉस्टल में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य की मौत के बाद संस्थान की व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सहायता पर गंभीर सवाल उठे हैं। बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले आदित्य का शव 10 अक्टूबर की रात हॉस्टल के कमरे में मिला। पुलिस के मुताबिक, कमरा अंदर से बंद था और हॉस्टल के अन्य छात्रों ने इसकी जानकारी संस्थान के प्रशासन को दी। घटना के बाद एक छात्र ने आरोप लगाया कि समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली, संस्थान की एंबुलेंस में ड्राइवर नहीं था और वार्डन ने उन्हें आदित्य को CPR देने से रोका। छात्र ने इसे हत्या का मामला बताते हुए संस्थान की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह और किसी आपराधिक घटना की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

‘एंबुलेंस में ड्राइवर नहीं था’, छात्र ने लगाए गंभीर आरोप

घटना के बाद एक प्रथम वर्ष के छात्र ने संस्थान की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठाए। उसके अनुसार, जब आदित्य की हालत गंभीर थी, तब उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए कोई तैयार नहीं था। छात्र ने दावा किया कि संस्थान की एंबुलेंस में ड्राइवर नहीं था और वार्डन ने उन्हें आदित्य को CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन देने से रोक दिया। CPR एक आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल सांस या हृदय गति रुकने जैसी स्थिति में व्यक्ति की जान बचाने के प्रयास के लिए किया जाता है।

छात्र ने कहा कि इन परिस्थितियों में संस्थान के अधिकारियों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई। उसने आदित्य की मौत को आत्महत्या मानने के बजाय हत्या का मामला बताया। हालांकि, यह छात्र का आरोप और उसका आकलन है। उपलब्ध जानकारी में पुलिस ने मौत को हत्या घोषित नहीं किया है और न ही घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि हुई है।

कमरे में बंद मिला छात्र, शनिवार रात सामने आई घटना

पुलिस के अनुसार, शनिवार, 10 अक्टूबर की रात हॉस्टल के छात्रों ने आदित्य के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद पाया। इसके बाद उन्होंने संस्थान के प्रशासन को सूचना दी। मृतक की पहचान बिहार के पूर्णिया जिले के निवासी आदित्य के रूप में हुई है, जो IIIT रांची में प्रथम वर्ष का छात्र था।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र की मौत किस परिस्थिति में हुई, कमरे का दरवाजा कैसे खोला गया और घटनास्थल से क्या साक्ष्य मिले। इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आ सकते हैं। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले घटनाक्रम की पूरी जांच जरूरी है।

संस्थान की जवाबदेही पर उठे सवाल

इस घटना ने हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं। शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के लिए ऐसी व्यवस्था होना जरूरी है, जिसके तहत किसी भी गंभीर स्वास्थ्य आपातस्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। एंबुलेंस, प्रशिक्षित कर्मचारियों और जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था में चूक गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

यदि एंबुलेंस में वास्तव में ड्राइवर उपलब्ध नहीं था या CPR देने से रोका गया, जैसा कि छात्र ने आरोप लगाया है, तो इन पहलुओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। संस्थान प्रशासन को भी घटनाक्रम पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि छात्र को सहायता उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।

मौत की वजह और लापरवाही की जांच जरूरी

आदित्य की मौत केवल एक छात्र की मृत्यु का मामला नहीं है; इसने हॉस्टल में आपातकालीन प्रतिक्रिया और संस्थागत जिम्मेदारी से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। पुलिस को मौत की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच करनी होगी। साथ ही, चिकित्सा सहायता में कथित देरी या बाधा के आरोपों की भी पड़ताल जरूरी है।

अब सबसे अहम सवाल हैं—आदित्य की मौत कैसे हुई, क्या उसे समय पर चिकित्सा सहायता मिली और क्या किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। दोष साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि छात्रों की सुरक्षा और संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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