व्यापार | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 मई 2026
भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली Unified Payments Interface (UPI) ने दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी पहचान बना ली है। साल 2016 में लॉन्च हुआ यह सिस्टम आज देश की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। जिस तकनीक को शुरुआत में एक नई सुविधा माना जा रहा था, वही अब भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन गई है। UPI को अप्रैल 2016 में National Payments Corporation of India (NPCI) ने लॉन्च किया था। उस समय इसका उद्देश्य लोगों को आसान, तेज और सुरक्षित डिजिटल भुगतान का विकल्प देना था। शुरुआती दौर में इसका इस्तेमाल सीमित था, लेकिन नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलने से UPI तेजी से लोकप्रिय हुआ। धीरे-धीरे स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने भी इसे हर वर्ग तक पहुंचा दिया।
आज स्थिति यह है कि UPI के जरिए हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार, UPI पर मासिक लेनदेन 10 अरब (बिलियन) से अधिक के स्तर को पार कर चुका है और ट्रांजैक्शन वैल्यू लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े बिजनेस तक, हर कोई इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है। QR कोड स्कैन करके भुगतान करना अब देशभर में एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है।
UPI की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता और रियल-टाइम ट्रांसफर है। इसमें पैसे सीधे बैंक खाते से दूसरे खाते में तुरंत पहुंच जाते हैं, जिससे किसी मध्यस्थ की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा, BHIM, Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे कई ऐप्स के जरिए इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे इसकी पहुंच और बढ़ी है।
इस प्लेटफॉर्म ने न केवल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है, बल्कि नकदी पर निर्भरता भी कम की है। सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ पहल को भी इससे बड़ी मजबूती मिली है। पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी इसका बड़ा फायदा हुआ है, क्योंकि अब भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित और आसान हो गया है।
UPI अब भारत की सीमाओं से बाहर भी अपनी पहचान बना रहा है। सिंगापुर, यूएई, नेपाल, फ्रांस जैसे कई देशों में इसकी सुविधा शुरू हो चुकी है या प्रक्रिया में है। इससे भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को विदेशों में भी आसानी से भुगतान करने की सुविधा मिल रही है और भारत की डिजिटल तकनीक को वैश्विक मंच पर पहचान मिल रही है।
UPI की सफलता यह दिखाती है कि सही तकनीक, मजबूत नीतियों और व्यापक पहुंच के साथ कोई भी देश डिजिटल बदलाव में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। 2016 में शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है और आने वाले समय में इसके और विस्तार की उम्मीद की जा रही है।




