अवधेश | नई दिल्ली 28 दिसंबर 2025
उन्नाव रेप मामले की पीड़िता और उसका परिवार एक बार फिर इंसाफ की गुहार लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। हाथों में तख्तियां, आंखों में आंसू और आवाज़ में गहरा दर्द—यह प्रदर्शन सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि उस भरोसे की पुकार है जो पीड़िता और उसके परिवार का न्याय व्यवस्था पर डगमगा गया है।
पीड़िता और उसकी मां ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है, जिसमें दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित की गई। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से न सिर्फ उन्हें मानसिक आघात पहुंचता है, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।
प्रदर्शन के दौरान पीड़िता ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उसकी नहीं, बल्कि हर उस बेटी की है जो ताकतवरों के आगे दबा दी जाती है। उसकी मां ने भावुक होते हुए कहा कि परिवार पहले ही बहुत कुछ खो चुका है और अब उन्हें सिर्फ सुरक्षा और इंसाफ चाहिए, कोई सहानुभूति नहीं।
जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों में गुस्सा भी था और डर भी। कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हुआ, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में स्थिति संभाल ली गई। इसके बावजूद पीड़िता के परिवार का कहना है कि न्याय मिलने तक उनका संघर्ष रुकेगा नहीं।
उल्लेखनीय है कि उन्नाव रेप मामला देश की अंतरात्मा को झकझोरने वाला रहा है। सालों की कानूनी लड़ाई, पीड़िता के पिता की मौत, लगातार धमकियां—इन सबके बावजूद परिवार आज भी अदालतों पर भरोसा रखे हुए है। अब उनकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां से उन्हें उम्मीद है कि इंसाफ सिर्फ कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर भी दिखेगा।
यह प्रदर्शन एक बार फिर यह सवाल छोड़ जाता है—क्या ताकतवरों के मामलों में न्याय की रफ्तार और पैमाना बदल जाता है, या फिर सिस्टम पीड़ित के साथ खड़ा होगा?




